
ब्यावरा। संघ का उद्देश्य सत्ता प्राप्त का नहीं है, बल्कि चरित्रवान व्यक्ति निर्माण कर राष्ट्र का उत्थान करना है. व्यक्ति जब राष्ट्र के प्रति समर्पित और नीति-निष्ठ होता है, तभी देश का संचालन सशक्त रूप से हो सकता है. जब तक व्यक्ति देशभक्त और चरित्रवान नहीं होगा, तब तक राष्ट्र सशक्त नहीं हो सकता.
उक्त उद्गार नगर में निकले पथ संचलन के दौरान बौद्धिक में प्रांत कार्यवाह सेठिया ने व्यक्त किए. डा. हेडगेवार ने 1925 में जब एक कमरे में संघ की स्थापना की, तब यह विचार किया कि आजादी के बाद देश एकजुट कैसे रहेगा. महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाया गया, हजारों स्वयं सेवकों को जेल में डाला गया परंतु संघ कुंदन बनकर निकला. 1962 के भारत-चीन युद्ध में संघ की भूमिका पर सरकार ने गणतंत्र दिवस परेड में संघ को आमंत्रित किया. आपातकाल में भी हजारों स्वयंसेवक जेल गए, लेकिन संघ नहीं झुका.
उन्होंने कहा कि संघ का कार्य शुद्ध सात्विक प्रेम और सामाजिक समरसता पर आधारित है. आज समाज संघ के साथ कदमताल कर रहा है. हिंदू एक नहीं हो सकते यह मिथक संघ ने तोड़ा है. मत अलग हो सकते है, लेकिन मन में भेद नहीं होना चाहिए. यही संघ की भावना है.
संघ की तप, त्याग और साधना की यात्रा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को नगर में भव्य पथ संचलन का आयोजन हुआ. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं संघ के प्रांत कार्यवाह हेमंत सेठिया ने कहा कि संघ की सौ वर्षों की यात्रा तप, त्याग और साधना की यात्रा है. अनेक दमन, उपहास और प्रतिबंधों के बावजूद संघ का स्वयंसेवक न कभी डरा, न रुका, न थमा.
पांच परिवर्तन का लक्ष्य
श्री सेठिया ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में समाज में पांच प्रमुख परिवर्तन लाने का लक्ष्य है. स्व का बोध और स्वाभिमान जागरण, सामाजिक समरसता का विस्तार, स्वदेशी जीवनशैली का प्रचार, पर्यावरण एवं प्रकृति संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्य बोध का प्रसार.
उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण हो चुका है, अब समय है भगवान श्री राम के जीवन मूल्यों को समाज में उतारने का. समाज में फैली खाई को पाटना और समरसता का भाव जगाना ही सच्चा राष्ट्र कार्य है.
आठ बस्तियों से निकला पथ संचलन
नगर में में आयोजित पथ संचलन में आठ बस्तियों के स्वयं सेवकों ने भाग लिया. सभी पीपल चौराहा पर एकत्र हुए, जहां से सामूहिक संचलन प्रारंभ हुआ. कदमताल करते स्वयंसेवक क्लब ग्राउंड पहुंचे, जहाँ मुख्य उद्बोधन हुआ.
पुष्पवर्षा से स्वागत
पथ संचलन के दौरान समूचे मार्ग पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयं सेवकों का जोरदार स्वागत किया. समूचा वातावरण राष्ट्रभक्ति और संगठन की भावना से ओतप्रोत नजर आया. पथ संचलन देखने मार्ग पर बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे.
