
ग्वालियर। शरद पूर्णिमा उस दिन मनाते है, जिस दिन आश्विन पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा उदित होता है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में खीर रखा जाता है। पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर है।
ज्योतिषाचार्य जगदीश अरोरा ने बताया कि शरद पूर्णिमा हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। शरद पूर्णिमा को आश्विन पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कोजागर पूर्णिमा के नाम से जानते हैं। हालांकि इन सभी का अलग-अलग महत्व है। हिंदू धर्म शास्त्रों में साल की सभी 12 पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा को सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जाता है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में खीर को रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की बूंदें बरसती हैं। जब खीर को खुले में रखते हैं तो वे किरणें उस खीर में पड़ती हैं, जिससे वह औषधीय गुणों वाला और अमृत समान हो जाता है। उस खीर को खाने से सेहत ठीक रहती है।
*दोपहर में आएगी तिथि*
शरद पूर्णिमा उस दिन मनाते है, जिस दिन आश्विन पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा उदित होता है। पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर दिन सोमवार को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर प्रारंभ हो रही है। यह तिथि अगले दिन 7 अक्टूबर मंगलवार को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर खत्म होगी। ऐसे में आश्विन पूर्णिमा का चंद्रोदय 6 अक्टूबर को होगा। इसलिए शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर सोमवार को मनाई जाएगी।
शरद पूर्णिमा शुभ मुहूर्त
शरद पूर्णिमा के दिन सुबह में व्रत रखकर सत्यनारायण भगवान की कथा करते हैं। शाम के समय में माता लक्ष्मी की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं। शरद पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4.39 बजे से सुबह 5.28 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.45 बजे से दोपहर 12.32 बजे तक रहेगा। इस दिन का निशिता मुहूर्त देर रात 11.45 बजे से रात 12.34 बजे तक रहेगा।
*चंद्रमा निकलने का समय*
6 अक्टूबर सोमवार को शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय शाम 5.27 बजे होगा। चंद्रास्त 7 अक्टूबर को सुबह 6.14 बजे होगा।
*खीर रखने का सही समय*
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपने 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर उज्ज्वल चांदनी पूरी धरती पर फैलाता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय शाम 5.27 बजे होगा, लेकिन उस समय चांद बस निकला ही होगा। शरद पूर्णिमा की रात 10.37 बजे से लेकर देर रात 12.09 बजे तक लाभ-उन्नति मुहूर्त है। इस शुभ समय में आप खीर चंद्रमा की किरणों में रखें। आपके लिए यह खीर स्वास्थ्य लाभ के साथ उन्नति प्रदान करने वाला होगा।
*यह शुभ योग रहेंगे*
इस साल की शरद पूर्णिमा वृद्धि योग और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में है। उस दिन वृद्धि योग प्रातरूकाल से लेकर दोपहर 01 बजकर 14 मिनट तक है। वहीं उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 7 अक्टूबर को तड़के 4.01 बजे तक रहेगा।
