
हिनौता 5 अक्टूबर। खजुरिहा ग्राम पंचायत में आज भी सडक़ निर्माण का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। गांव को मुख्य सडक़ से जोडऩे वाला मार्ग कच्चा और ऊबड़-खाबड़ होने के कारण बरसात के दिनों में पूरी तरह दलदल में बदल जाता है। सडक़ की अभाव में गांव के लगभग 15 बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहीं 3 गर्भवती महिलाएं भी नियमित जांच और अस्पताल जाने में भारी कठिनाइयों का सामना कर रही हैं।
ग्राम खजुरिहा ब्लॉक मझौली में सोशल मीडिया आज 5 अक्टूबर को पोस्ट जारी हुआ जिसकी तहकीकात से अवगत होने के लिए खजुरिहा निवासी प्रेमलाल पनिका बीएसएफ जवान से चर्चा की गई तो पता चला कि वास्तविक गंभीर समस्या है। गांव से मुख्य सडक़ की दूरी मात्र 500 मीटर है लेकिन सडक़ पक्की न होने से यह दूरी लोगों के लिए पहाड़ जैसी बन जाती है। बारिश में यह रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता है, जिससे पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार बरसात के मौसम में न तो बच्चे स्कूल जा पाते हैं न ही मरीज अस्पताल तक पहुंच पाते हैं। गांव के अभिभावकों ने बताया कि छोटे बच्चे रोजाना स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। कई बार माता-पिता को बच्चों को गोद में लेकर या फिसलन भरे रास्तों से ले जाना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और स्कूल में उनकी उपस्थिति बहुत घट गई है। सडक़ नहीं होने से बच्चे स्कूल छोडऩे को मजबूर हैं। बरसात में तो रास्ता तालाब जैसा हो जाता है। एक गर्भवती महिला ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल या जांच केन्द्र तक पहुंचने में बड़ी परेशानी हो रही है। यदि यही रवैया रहा तो डोली या चारपाई की सहारा बनेगी जिससे जच्चा-बच्चा दोनों की जान पर खतरा मंडराता रहता है। यदि सडक़ होती, तो हम सुरक्षित अस्पताल पहुंच पाते। बारिश में तो घर से निकलना भी खतरे से खाली नहीं होता।
ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
ग्रामवासियों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और पंचायत अधिकारियों से पक्की सडक़ निर्माण की मांग की है लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर 500 मीटर सडक़ बना दी जाए, तो बच्चों की शिक्षा और महिलाओं की सेहत दोनों सुरक्षित हो जाएंगी। ग्रामीणों की मांग है कि खजुरिहा गांव से मुख्य सडक़ तक तत्काल पक्की सडक़ निर्माण कराया जाए। बरसात से पहले अस्थायी मिट्टी मार्ग या जलनिकासी की व्यवस्था की जाए।
