इंदौर: कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री 5 अक्टूबर के बाद इंदौर में विधायक पुत्र पर एफआईआर को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे. पूर्व मुख्यमंत्री ने यह बात पोस्ट सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कही है. उन्होंने पुलिस की इतने संवेदनशील मामले में कारवाई नहीं करने को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं.पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 5 अक्टूबर को जिला कोर्ट में विधायक पुत्र पर एफआईआर दर्ज करने को लेकर याचिका दायर करेंगे. पिछली 27 सितंबर को सराफा थाने में विधायक पुत्र एकलव्य गौड़ पर एफआईआर दर्ज करने का आवेदन दिया था.
इस पर अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर को आवेदन देकर एक समुदाय विशेष के लोगों को नौकरी निकालने और उनको रोजी रोटी छीनने के खिलाफ कारवाई करने की मांग की थी. इस पर अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर ने कारवाई करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा था. उक्त मामले में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और समय मांगने को लेकर दिग्विजय सिंह ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए है. पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि 15 सितंबर को कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा विधायक पुत्र पर एफआईआर करने का आवेदन दिया गया.
पुलिस कमिश्नर कार्यालय से इतने संवेदनशील मामले में सराफा थाने तक पहुंचने में एक हफ्ता लग गया. इतने संवेदनशील मामले पर पुलिस द्वारा कारवाई नहीं करना पुलिस द्वारा आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है. उक्त मामले में पुलिस और विधायक पुत्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की याचिका दायर करेंगे. साथ ही संविधान का पालन नहीं करने की कारवाई भी करने को लेकर कोर्ट में आवेदन देंगे.
यह है मामला
विधायक मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्य गौड़ ने पिछले महीने शीतलामाता बाजार में मुस्लिम समुदाय के लोगों को नौकरी से निकालने का फरमान जारी किया था. इसके बाद कई व्यापारियों ने त्यौहार को देखते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों को नौकरी से हटा दिया, बल्कि उनको घर भेजकर किए जाने वाले सभी तरह के कार्य भी बंद कर दिए. इसके बाद राजनीति तेज हो गई और कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के साथ पुलिस कमिश्नर को कार्रवाई करने के लिए आवेदन देकर आया था
