
छिंदवाड़ा। रामलीला महोत्सव के चौदह दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत तेरहवें दिन की लीला का मंचन अतिकाय, अहिरावण एवं नारांतक वध प्रसंगों पर आधारित रहा। तेरहवें दिन के युद्ध प्रसंगों का दर्शकों ने उत्साहपूर्वक आनंद लिया।रामलीला मंडल के सचिव राजेंद्र आचार्य ने बताया की मंचन की शुरुआत रावण द्वारा अतिकाय को युद्धभूमि की ओर भेजने से हुई। अतिकाय का वध लक्ष्मण जी के हाथों होते ही लीला में रोचकता और बढ़ गई। इसके बाद अहिरावण प्रसंग का जीवंत मंचन किया गया। अहिरावण द्वारा राम-लक्ष्मण का बंदी बनाकर पाताल ले जाना तथा हनुमान जी का वहां पहुंचकर युद्ध कर अहिरावण का वध करना दर्शकों के लिए अत्यंत रोमांचकारी रहा। लीला के अगले प्रसंग में रावण को अहिरावण वध का समाचार मिलता है और वह अपने पुत्र नरांतक एवं देवांतक को युद्ध के लिए भेजता है। युद्धभूमि में हुए भीषण युद्ध के दौरान देवांतक का वध तो होता है परंतु नरांतक को कोई परास्त नहीं कर पाता। तब युद्ध के सुग्रीव पुत्र दधिबल को बुलाया जाता है जिन्हें हनुमान जी युद्धभूमि में लेकर आते हैं और विभीषण के संकेत पर दधिबल को नरांतक के वध का आदेश दिया जाता है। मंचन के अंतिम चरण में दधिबल और नरांतक का भीषण संवाद एवं युद्ध दिखाया गया, जिसमें अंगद द्वारा नरांतक का वध कर दिया जाता है। तेरहवें दिन की इस रामलीला ने दर्शकों को रोमांच और भक्ति से ओतप्रोत कर दिया। लीला के समापन पर भक्तिमय वातावरण में विश्राम आरती संपन्न हुई। बता दे कि
प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी गौ धुली बेला ठीक शाम 6.30 बजे रावण पुतले का दहन किया जाएगा। दोपहर 03 बजे भगवान श्री राम का रथ छोटी बाजार से निकलेगा एवं 5 बजे दशहरा मैदान पहुंचेगा। जहां प्रतीकात्मक लीला का मंचन कलाकारों द्वारा किया जाएगा।
