जबलपुर: कुटुम्ब न्यायालय के तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश मुकेश कुमार दांगी की अदालत ने अपने एक आदेश में कहा कि पति द्वारा लिए गए ऋण की किश्त को भरण पोषण के संदर्भ में उसकी मासिक आय से कम नहीं माना जा सकता। पत्नि के शिक्षित होने व ट्यूशन पढ़ाने से आय अर्जित करने के दस्तावेज पेश न होने से उसे भरण पोषण राशि देने से इंकार नहीं किया जा सकता। भरण पोषण के मामले में पत्नी द्वारा पति के विरुद्ध पूर्व में कोई पुलिस रिपोर्ट किया जाना भी आवश्यक नहीं है। महज दो हजार रुपये की भरण पोषण राशि पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। इसलिये ग्यारह हजार स्थायी भरण पोषण राशि स्वीकृत की जाती है।
आवेदिका पत्नी की ओर से अधिवक्ता सुशील त्रिपाठी व आदित्य सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आवेदिका का पति रेलवे कर्मी है। उसका मासिक वेतन 46 हजार 717 रुपये है। शासकीय कटौती के बाद उसे 24 हजार 675 रुपये प्राप्त होते हैं। ऋण की किश्त के कारण यह स्थति बनी है। पति का कहना है कि ऋण की किश्त और पत्नी की ट्यूशन की आमदनी के आधार पर भरण-पोषण राशि की मांग अस्वीकार किए जाने योग्य है। अदालत ने सभी तर्क अस्वीकार कर पत्नी के हक में आदेश सुनाया।
