जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने रीवा के कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास डुबगवां में अधीक्षिका की पदस्थापना के मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने कलेक्टर रीवा को वार्डन के चार्ज को लेकर उपजे विवाद का निराकरण करने के निर्देश दिए। एकलपीठ ने कहा है कि अभ्यावेदन पर निर्णय लेने के पहले याचिकाकर्ता व अनावेदक को सुनवाई का अवसर भी दें।
रीवा निवासी शकुंतला देवी निरत की ओर से अधिवक्ता शिशिर सोनी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता अनुसूचित जनजाति बालिका छात्रावास मऊगंज में वार्डन के पद पर पदस्थ थीं। उन्हें 24 जुलाई 2023 को डुबगवां छात्रावास का प्रभार भी दिया गया। दलील दी गई कि कलेक्टर ने 29 अगस्त 2025 को अनावेदिका आशा द्विवेदी को डुबगवां का वार्डन बना दिया, जबकि उन पर अनियमितता के आरोप थे। याचिकाकर्ता ने 6 सितंबर 2024 को ही मऊगंज छात्रावास के वार्डन पद से इस्तीफा दे दिया है।
