खुले फरियाली आटे से फूड पॉइजनिंग, एक ही परिवार के छह लोग बीमार

मक्सी।नवरात्रि पर्व के दौरान हर साल फरियाली आटे को लेकर फूड पॉइजनिंग के मामले सामने आते रहते हैं. ऐसा ही एक प्रकरण मक्सी में गत दिवस सामने आया है, जहां खुले फरियाली आटे से बने फरियाल को खाने के तुरंत बाद एक ही परिवार के छह लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए, जिसमें एक 13 वर्षीय बालिका मेघा पांचाल भी शामिल है. इनमें से तीन लोगों को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया था. हालांकि अब सभी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है.

यह मामला रविवार शाम का है. जब मक्सी निवासी राजमणि पांचाल व्रत के लिए फरियाली सामग्री लेने मक्सी बस स्टैंड के बाहरी क्षेत्र के एक किराना व्यापारी के पास गई. वहां से उन्होंने राजगिरा और सिंघाड़े का खुला आटा लिया. परिवार के नौ सदस्यों में से छह सदस्यों ने उसी आटे से बनी व्रत सामग्री का सेवन किया, लेकिन भोजन के एक घंटे के भीतर ही सभी की तबीयत बिगडऩे लगी, जिससे घर में अफरा-तफरी मच गई. परिजन तत्काल सभी को मक्सी के निजी मनोज हॉस्पिटल ले गए, लेकिन हालत गंभीर होते देख सभी को उज्जैन स्थित संजीवनी हॉस्पिटल रैफर किया गया. जहां तीन लोगों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और बाकी तीन को जनरल वार्ड में इलाज मिला. गनीमत रही कि दो दिन के इलाज के बाद सभी को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गई.

सख्त कार्यवाही की मांग

पांचाल परिवार ने इस घटना के लिए किराना दुकानदार की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है और प्रशासन से मांग की है कि दोषी दुकानदार के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. नवभारत संवाददाता ने फूड पॉइजनिंग के कारण आटा देने वाले दुकानदार की जानकारी चाही, तो परिवार के सदस्य जितेंद्र पांचाल ने बताया कि आटा उनकी माता राजमणि पांचाल लेकर आई थीं, लेकिन वर्तमान में फूड पॉइजनिंग के चलते उनकी तबीयत खराब होने की वजह से कमजोरी आ गई है, जिस कारण वह दुकानदार का नाम नहीं बता पा रही हैं.

 

दो दिन आईसीयू में जिंदगी और मौत से लड़ाई

महेश पांचाल, नितिन पांचाल, राजमणि पांचाल, हर्षिता पांचाल, मेघा पांचाल 13 वर्ष और जितेंद्र पांचाल. इन छह लोगों की तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि परिवार वालों को जान का डर सताने लगा था. उन्होंने बताया कि दो दिन तक परिवार के तीन सदस्य आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे. दो दिन तक इलाज के बाद अब सभी को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल चुकी है, लेकिन कमजोरी और मानसिक आघात अभी भी बना हुआ है.

खुले आटे की बिक्री पर उठे सवाल…

इस घटना ने एक बार फिर से बाजार में बिकने वाले खुले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. नवरात्रि जैसे पवित्र पर्व पर जब लोग व्रत के लिए विशेष शुद्धता की उम्मीद रखते हैं, तब ऐसी घटनाएं न केवल लापरवाही दर्शाती हैं, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ भी है.

इनका कहना है

उक्त बात सीएम हेल्पलाईन के माध्यम से संज्ञान में आई है. जल्द ही उस पर कार्यवाही की जाएगी.

एमके वर्मा, खाद्य अधिकारी

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