विंध्य की डायरी
डा. रवि तिवारी
भाजपा के संगठनात्मक जिलों में से अधिकांश जिलो की कार्यकारिणी घोषित हो चुकी है. घोषणा के बाद लगातार विवाद भी सामने आ रहे है. रीवा में कई विवादित नेता भी उपकृत हुए है, जिन्हे दायित्व दिया गया है. भाजपा की कथनी-करनी में अंदर देखने को मिला है. पार्टी गाइड लाइन का सही तरीके से पालन होता तो इनमें से कई नियुक्त पदाधिकारी सूची से बाहर होते और उनके जगह खाटी कार्यकर्ता को स्थान मिलता. सिंगरौली में भाजपा जिलाध्यक्ष के प्रबल दावेदारो में शामिल रहे राजेश तिवारी को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया तो उन्होने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
दो बार जिला उपाध्यक्ष रह चुके है, इसके पूर्व मऊगंज में राहुल गौतम ने भी उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद इस्तीफा दिया था. लम्बे इंतजार के बाद आखिरकार नवरात्रि में भाजपा जिला कार्यकारिणी रीवा की सूची जारी कर दी गई. सूची को लेकर विधायकों ने कई नामो पर पेंच फसा रखा था. मंथन के बाद सूची जारी करते हुए विवादित नेताओं को पदाधिकारी बनाया गया है.
विधायको के साथ तालमेल बनाए रखने के लिये पार्टी ने कई ऐसे नेताओं को भी उपकृत करते हुए पदाधिकारी बना दिया है जिनका विवादों से नाता रहा है. सामंजस्य बैठाने के लिये पार्टी ने पांच महिलाओं को भी शामिल किया है. जातियों का तालमेल बैठाने का प्रयास किया गया है. पूर्व अध्यक्ष के खेमे के बहुत कम लोगो को अवसर दिया गया है. पार्टी के पुराने नेताओं को भी इस बार तरजीह नही मिली है. कुछ विधायकों के करीबी है जिन्हे मौका मिला है. कई खाटी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया है. सूची को लेकर कई नेता नाराज है पर अंदर ही अंदर घुट रहे है मुखर होकर विरोध करने की हिम्मत नही जुटा पा रहे है.
यह है मोहन सरकार
जनता से अभद्र व्यवहार डा0 मोहन सरकार में अक्षम्य है, यह बात एक बार फिर से साबित हुई. जब मऊगंज जिले में अभद्र व्यवहार करने वाले प्रभारी तहसीलदार को शासन द्वारा निलंबित कर दिया गया. गाली बाज तहसीलदार पर निलंबन की गाज कलेक्टर के प्रस्ताव के बाद गिरी. दरअसल शनिवार को प्रभारी तहसीलदार मऊगंज वीरेन्द्र कुमार पटेल का एक वीडियो वायरल हुआ. जिसमें वह एक व्यक्ति से अशिष्ट भाषा का प्रयोग करते हुए अमर्यादित व्यवहार करते दिखे. फिर क्या था वीडियो वायरल होते ही सरकार एक्शन में आई और गाली गलौज करने वाले प्रभारी तहसीलदार पर निलंबन की गाज गिरी. एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि जनता के साथ दुर्व्यवहार करने वालो को सरकार कभी माफ नही करती फिर चाहे कोई भी हो किसी पद पर ।
एफआईआर बनी गले की फांस
ऊर्जाधानी में इस समय राजनीति गरमाई हुई है, गली चौराहो से लेकर चाय-पान की दुकानो में केवल एफआईआर की चर्चा है और चर्चा हो भी क्यों ना जब विधायक की एफआईआर पर नेताजी सलाखों के पीछे चले जाए. देवसर विधायक पर सोशल मीडिया में टिप्पणी कर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव भास्कर मिश्रा बुरे फस गए. फिर क्या था विधायक ने कोतवाली पहुंचकर नेताजी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी और पुलिस ने भी बगैर देर किये नेताजी को उठाकर सलाखों के पीछे भेज दिया. अब इस एफआईआर को लेकर चारो तरफ आलोचनाएं हो रही है. कांग्रेस और हर समाज के लोग जहा आलोचना कर रहे है वही भाजपा के नेता भी दबी जुबान में आलोचना करते हुए इसे निंदनीय बता रहे है
