नर्मदा में डूबने की घटनाओं से प्रशासन चिंतित, अवैध रेत उत्खनन बना प्रमुख कारण

सीहोर/बुधनी: बुदनी घाट पर नहाते समय डूबे दो युवकों का दूसरे दिन भी पता नहीं चल सका है. पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम उन्हें खोजने में जुटी है, जबकि परिजन घाट पर डटे हैं. जिले में नर्मदा नदी में लगातार हादसे हो रहे हैं. पिछले छह महीनों में आठ लोग डूब चुके हैं, जिनमें से तीन की मौत हो चुकी है और तीन का कोई सुराग नहीं मिला.

विशेषज्ञों और प्रशासन के अनुसार, अवैध रेत उत्खनन के कारण नदी का तल जगह-जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो गया है. आंवली घाट पर नर्मदा की गहराई 101 फीट तक पहुँच गई है, जबकि कई स्थानों पर 25 से 75 फीट तक गहरे गड्ढे हैं. पुलिस ने पहले नाव और रस्सी की मदद से गहराई नापी थी, जिससे स्थिति और स्पष्ट हुई.

हालांकि घाटों पर चेतावनी बोर्ड, पुलिस की मौजूदगी और एडवाइजरी जारी की जाती है, हादसों में कमी आई है, लेकिन अवैध उत्खनन और गहरे पानी के कारण दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं. प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि घाटों को सुरक्षित बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.
दीपक कुमार शुक्ला, पुलिस अधीक्षक, सीहोर

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