सलामतपुर: बेरखेड़ी चौराहा इन दिनों एक अनोखे आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। राजस्थान से आए एक बहरूपिये ने अलग-अलग भेष धारण कर ग्रामीणों और बच्चों का मनोरंजन शुरू कर दिया है। कभी महापुरुष, कभी पौराणिक पात्र तो कभी हास्य रूप में नजर आने वाला यह कलाकार दुकानों और गलियों में अपनी कला दिखाता है। खासकर बच्चों में उनके प्रति उत्साह देखने को मिल रहा है, वे हर दिन नए भेष का इंतजार करते हैं।
बदलते दौर में जब टीवी, मोबाइल और इंटरनेट ने मनोरंजन के नए साधन बना दिए हैं, ऐसे में बहरूपिये की कला लोगों को पुराना दौर याद दिला रही है। पहले गांव-गांव में महीनों तक बहरूपिये रुककर रोज नया रूप दिखाते थे, लेकिन अब यह परंपरा लगभग लुप्त हो चुकी है।राजस्थान के इस बहरूपिये का परिवार पीढ़ियों से इसी कला से जीवन यापन करता रहा है। वे बताते हैं कि अब प्रोत्साहन न मिलने से आजीविका चलाना कठिन हो गया है। बावजूद इसके, वह अपनी कला को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल बेरखेड़ी में उनकी मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है।
