पंचमी पर पांढरीपाठ दरबार में विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन

बालाघाट। धर्मनगरी लांजी अंतर्गत ग्राम वारी के खराड़ी जलाशय की पहाड़ी पर स्थित मां पांढरीपाठ दरबार में शारदेय नवरात्रि के अवसर पर रोजाना ही विविध धार्मिक आयोजन संपन्न कराये जा रहे है। मंदिर में रोजाना ही क्षेत्र सहित अन्य राज्यों से भजन मंडली एवं कलाकारों द्वारा माता की सेवा में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी जा रही है। इसी कड़ी में शनिवार 27 सितंबर को पंचमी तिथि के अवसर पर छत्तीसगढ़ से मां पांढरीपाठ दरबार में पहुंचे कलाकारों ने माता के भक्ति गीतों सहित देश भक्ति के गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। इस अवसर पर मंदिर में परिसर में हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे और छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा दी जा रही प्रस्तुति को बड़े ही श्रद्धा भाव से सुना। इसी बीच कलाकारों की प्रस्तुति के दौरान मंदिर में उपस्थित जनसमुदाय द्वारा लगातार माता के जयकारों की गूंज भी उनमें जोश भरने का कार्य कर रही थी। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई झाकियां भी लोगों के लिये आकर्षण का केंद्र बनी रही। जिसमें सामूहिक नृत्य, शेर पर सवार भारत माता झांकी, देश के जवानों द्वारा सीमा पर देश की रक्षा के लिये तैनाती से लेकर एकल नृत्य, गायकों की आकर्षक टोली दरबार में पहुंचे लोगों के पैर थामने के लिये काफी थी। जो भी श्रद्धालु भक्त माता की सेवा प्रस्तुत झांकियों और कलाकारों की प्रस्तुति को देखे उन्होने मुक्त कंठ से कलाकारों की सराहना की और ऐसे आयोजन के लिये मंदिर समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

*महाप्रसाद वितरण और मेले का भी आयोजन….*

उल्लेखनीय है की वारी ग्राम के खराड़ी जलाशय की पहाड़ी पर विराजमान मां पांढरीपाठ दरबार गौसेवा के लिये जिला सहित अन्य राज्यों में विख्यात है। नवरात्रि के अवसर पर माता के दरबार में हजारो की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है और माता आर्शीवाद प्राप्त करते है। मां पांढरीपाठ दरबार में वैसे तो यहां स्थित सभी गौमाताओं से प्राप्त दूध से यहां पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं को सेवकों द्वारा चाय पिलाई जाती है परंतु नवरात्र के पावन अवसर पर लगातार महाप्रसाद का भी वितरण किया जा रहा है, जिसमें पुलाव, खीर एवं अन्य व्यंजन शामिल है। मंदिर के नीचे ग्राम वारी तथा क्षेत्रिय लोगों द्वारा मेले के रूप में बाजार भी सजाया गया है जिसमें खान पान से लेकर माता की प्रतिमूर्ति एवं अन्य सामग्री के अलावा बच्चों के लिये झूले और खेलकूद की सामग्री भी उचित दामों पर लोगों को उपलब्ध हो रही है।

*गौसेवा के लिये जिला सहित अन्य राज्यों में विख्यात…..*

लांजी मुख्यालय से लगभग 9 किमी दूर मां पांढरीपाठ दरबार जो खराड़ी जलाशय की सुरम्य वादियों के बीच पहाड़ी पर स्थित है हमेशा से ही लोगों के लिये आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जिसका मुख्य कारण सेवकों द्वारा की जाने वाली गौमाताओं की सेवा है। जो भी यहां पहुंचता है यहां मौजूद गौमाताओं को देखकर निहारता ही रह जाता है। वहीं मंदिर समिति के सरंक्षक पंडाबाबा रेखलाल कावरे एवं संरक्षण सुधीर दशरिया द्वारा जब भी यहां गौमाताओं द्वारा बछड़े को जन्म दिया जाता है उनके नाम को मां दुर्गा के उपनामों के अनुरूप ही उनका नामकरण किया जाता है। गौसेवा के लिये मां पांढरीपाठ दरबार जिले सहित अन्य राज्यों में काफी ख्याति प्राप्त कर चुका है।

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