नयी दिल्ली 27 सितम्बर (वार्ता) अमेरिका के विभिन्न देशों पर लगाये जा रहे टैरिफ के बीच ब्रिक्स देशों ने व्यापारिक क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इनसे मौजूदा आर्थिक असमानताएं और बढ सकती हैं तथा वैश्विक आर्थिक विकास की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ उपायों को भी विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ बताते हुए कहा है कि इससे व्यापार में विकृति आयेगी।
ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80 वें सत्र से इतर शुक्रवार को भारत की अध्यक्षता में हुई बैठक में सदस्यों ने व्यापार-प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के प्रसार पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चाहे ये प्रतिबंध टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों में अंधाधुंध वृद्धि के रूप में हों, या संरक्षणवाद के रूप में, विशेष रूप से दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले उपायों के रूप में इनसे वैश्विक व्यापार में कमी, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एवं व्यापारिक गतिविधियों में अनिश्चितता पैदा होने का खतरा पैदा होता है। इससे मौजूदा आर्थिक असमानताएँ और बढ़ सकती हैं और वैश्विक आर्थिक विकास की संभावनाएँ प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ने पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जो व्यापार को विकृत करते हैं और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने ऐसी प्रथाओं के प्रति आगाह किया जिनसे वैश्विक व्यापार के विखंडन और वैश्विक दक्षिण के हाशिए पर जाने का खतरा है।
ब्रिक्स देशों ने विश्व व्यापार संगठन में सुधार और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मज़बूत बनाने पर ब्रिक्स घोषणापत्र का उल्लेख करते हुए गैर-भेदभावपूर्ण, खुले, न्यायसंगत, पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मज़बूत करने के लिए अपने अटूट समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके केंद्र में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) हो और साथ ही कम विकसित देशों (एलडीसी) सहित विकासशील सदस्यों के लिए विशेष एवं विभेदक व्यवहार के सिद्धांतों को कायम रखा जाए। मंत्रियों ने इथियोपिया और इस्लामी गणराज्य ईरान के विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने के प्रयास के प्रति अपना मज़बूत समर्थन दोहराया।
