
सीधी। बीमार पोते के स्वस्थ्य होने की मन्नत पूरी होने पर एक महिला ने पंडाल में विराजमान मां दुर्गा को अपनी जीभ काटकर अर्पित कर दी। महिला लगभग 13 घंटे तक खून से लथपथ वहीं पड़ी रही। घटना की खबर फैलते ही दुर्गा पंडाल में भीड़ लगने लगी और भजन-कीर्तन शुरू हो गए।घटना सेमरिया अंचल के रामगढ़ पंचायत के कोलान बस्ती में शुक्रवार की है। कल्लू बाई उम्र 80 वर्षीय का पोता अनंत कोल उम्र 16 वर्ष को एक साल पहले तेज बुखार आया था। वह 6 महीने तक बिस्तर पर रहा। फिर चलने-फिरने में असमर्थ हो गया।डॉक्टरों ने उसे लकवाग्रस्त तक घोषित कर दिया था। इस दौरान दादी कल्लू बाई ने मां दुर्गा से मन्नत मांगी थी कि यदि पोता ठीक हो गया, तो वह अपनी जीभ मां के चरणों में चढ़ा देगी।महिला का दावा है कि माता की कृपा से उसका पोता अब स्वस्थ है। इसी मन्नत को पूरा करने के लिए उसने शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे दुर्गा प्रतिमा के सामने अपनी जीभ काटकर चढ़ा दी। देर रात करीब 11 बजे जब महिला ने अपना मुंह खोला, तो लोगों के बीच यह चर्चा फैल गई कि उसकी जीभ वापस आ गई है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया था। लोगों की आस्था के चलते पुलिस और स्वास्थ्य अमला महिला की हालत पर नजर रखे हुए था।
डॉक्टर ने पोते को बताया था अपाहिज हो गया-
कल्लू बाई ने बताया मेरे पोते को एक साल से तकलीफ है। इसी नवरात्रि के पहले दिन उसे तेज बुखार था, जिसकी वजह से डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाया था। जब बुखार नहीं उतरा तो मैं फिर से उसे डॉक्टर के पास ले गई, लेकिन उनने देखने से मना कर दिया। डॉक्टर ने कहा कि पोते को पोलियो हो गया है, जिससे वह अपाहिज हो गया है। सीधी जिला अस्पताल में भी डॉक्टर ने बोला है यह अपाहिज हो गया है। इसे रीवा ले जाओ। ऑपरेशन से ही ठीक होगा।सेमरिया अस्पताल ले गए तो वहां भी डॉक्टर ने इलाज करने से मना कर दिया और कहा कि आप जबलपुर ले जाओ। तब मैंने सोचा कि मैं पोते को माता के चरणों में छोड़ दूंगी। माता ने इसे ठीक कर दिया। नवरात्रि आ गई। मैंने सपने में माता से पूछा कि क्या चाहती हो। मैंने घर में जीभ देने की बात कही तो माता ने मना कर दिया।माता ने कहा, न मंदिर और न ही घर में, मेरा स्थान अब इस समय पंडाल में है। वहीं पर जीभ देना। मैंने माता से कहा कि मुझे तकलीफ नहीं होनी चाहिए। माता ने सब अच्छा किया। मुझे ज्यादा तकलीफ भी नहीं हुई और ज्यादा खून भी नहीं बहा। इसके बाद मैंने अपनी जीभ काटकर एक प्लेट में रखकर माता के चरणों में रख दी।
पति की बीमारी में भी चढ़ाई थी जीभ-
कल्लू बाई के अनुसार उसने एक बार और जीभ चढ़ाई थी। उस दौरान शहडोल के कालरी एरिया में उसके पति काम करते थे। उन्हें काफी परेशानी थी और वह काम अच्छे से नहीं कर पा रहे थे। बीमारी की वजह से उनका काम कर पाना मुश्किल था तो आज से करीब 8 साल पहले शंकर जी और हनुमान जी के मंदिर के पास जाकर जीभ चढ़ाई थी, जिसके बाद वह ठीक हो गए थे।
इनका कहना है-
महिला की हालत फिलहाल स्थिर है लेकिन ऐसे कृत्य बेहद खतरनाक और जानलेवा हो सकते हैं। लोगों से मेरी अपील है कि धार्मिक आस्था के नाम पर अपनी जान जोखिम में न डालें।
डॉ. एस.बी. खरे, सिविल सर्जन
जिला अस्पताल सीधी
