सांची: नगर में स्थापित पशु चिकित्सालय का उद्देश्य पशुओं को उपचार उपलब्ध कराना था, लेकिन हकीकत यह है कि नगर और राष्ट्रीय राजमार्गों पर रोज़ाना घायल और तड़पते बेजुबान पशु भटकते रहते हैं, जबकि चिकित्सालय के जिम्मेदार उनकी सुध तक नहीं लेते.आए दिन तेज़ रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से ये पशु गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं, और उपचार न मिलने पर तड़पते हुए मौत को गले लगाने को मजबूर हो जाते हैं.
हाल ही में एक सांड गंभीर रूप से घायल होकर लंगड़ाता फिर रहा था, जिसके घावों में कीड़े तक पड़ चुके थे. नगरवासियों ने स्वयं पहल कर विदिशा से निजी चिकित्सक बुलाकर उसका इलाज कराया, लेकिन सांची का पशु चिकित्सालय पूरी तरह मौन बना रहा.वहीं, सरचंपा गांव में लड़ाई के दौरान लगभग 40 बकरी, गाय और भैंस घायल हुईं, जिस पर चिकित्सालय के सहायक पशु चिकित्सक शुभम मिश्रा तुरंत मौके पर पहुंचे और उपचार किया. सहायक पशु चिकित्सक सुरभि बुनकर ने कहा कि उन्हें घायल सांड की सूचना नहीं मिली, वरना उसका भी इलाज किया जाता.
इस पर बड़ा सवाल यह है कि जब नगर के बसस्टैंड परिसर और मुख्य सड़कों पर रोज़ घायल पशु भटक रहे हैं, तो क्या चिकित्सालय के जिम्मेदार इसे नहीं देख सकते? सांची स्थित चिकित्सालय को घायल पशुओं की देखभाल के लिए सूचना का इंतजार क्यों करना पड़ता है?नगरवासी मांग करते हैं कि पशु विभाग तुरंत सक्रिय होकर आपातकालीन उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करे, अन्यथा यह लापरवाही न केवल पशुओं के लिए, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है.
