जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने एनएसए के तहत अवैध व गलत हिरासत का आदेश जारी करनेे के मामले को काफी सख्ती से लिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ के समक्ष गुरुवार को सुनवाई दौरान शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह व एसपी रामजी श्रीवास्तव हाजिर हुए। डॉ. केदार सिंह ने माना कि उन्होंने हिरासत का गलत आदेश जारी कर दिया था, उनसे त्रुटि हुई है, दरअसल एक साथ दो प्रकरणों को डील कर रहे थे, जिस कारण त्रुटि हो गई।
उक्त जवाब से सहमत न होते हुए न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार के बड़े अधिकारियों ने भी अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया और उक्त आदेश पर अपनी हरी झंडी दे दी। युगलपीठ ने मामले में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा पेश के निर्देश देते हुए पूछा है कि उक्त चूक के लिये क्यो न भारी जुर्माना लगाया जाये, मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।
दरअसल यह मामला शहडोल निवासी हीरामणि बैस की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता ब्रहमेन्द्र पाठक ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि आवेदक के खिलाफ एक ही दिन में एनएसए के तहत पूरा आदेश जारी कर दिया और कोई वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इतना ही नहीं किसी भी स्वतंत्र गवाह का कथन नहीं लिया गया।
याचिकाकर्ता व उनका पुत्र बुडवा में निवासरत हैं, जो शहडोल से सौ किमी. दूर है। यह भी आरोप है कि उक्त अवैधानिक आदेश जिले के रेत ठेकेदार के प्रभाव में आकर किया गया है। जिसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने अधिकारियों को तलब किया था। उक्त आदेश के परिपालन में हाजिर हुए कलेक्टर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए त्रुटि होने की बात कही, जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
