नयी दिल्ली 22 सितम्बर (वार्ता) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने युद्ध के बदलते स्वरूपों के बीच भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए विमानों, युद्धपोतों, हथियारों, नेटवर्क और रक्षा सिद्धांतों के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने के लिए शिक्षा, स्टार्टअप और उद्योग जगत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। जनरल चौहान ने सोमवार को यहां तीनों सेनाओं की अकादमिक प्रौद्योगिकी संगोष्ठी (टी-सैट्स) के पहले संस्करण का यहां उद्घाटन किया। इसमें भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विशिष्ट और भविष्य की प्रौद्योगिकी के विकास के लिए सेवा-अकादमिक अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र का समन्वय किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख सरकारी और निजी प्रौद्योगिकी संस्थानों सहित कुल 62 संस्थानों के छात्रों के साथ-साथ शैक्षणिक और प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के निदेशकों और विभागाध्यक्षों ने भाग लिया।
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए उन्नत, एकीकृत तकनीकी समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भविष्य की संचालन मांगों को पूरा करने के लिए प्लेटफार्मों, हथियारों, नेटवर्क और रक्षा सिद्धांतों में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने में शिक्षा, स्टार्टअप और उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षा जगत से नवाचार को बढ़ावा देने और भारत को अगली पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकियों में विश्व में अग्रणी बनने के की दिशा में कार्य करने को कहा।
जनरल चौहान ने एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया जिसमें शिक्षा जगत द्वारा चयनित 47 नवाचार प्रदर्शित किये गये। इन नवाचारों का मूल्यांकन तीनों सेनाओं के विभिन्न प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों द्वारा उनके संभावित सैन्य अनुप्रयोगों के लिए किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग के लिए नौ समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किये गये।
