
सीहोर।जिले के आष्टा तहसील के नानकपुर गांव से निकली यह तस्वीरें किसी का भी दिल दहला सकती है. वृद्ध महिला पार्वती बाई की अंत्येष्टि के समय आसमान से लगातार बरसते पानी ने सभी को विवश कर दिया.
घुटनों तक कीचड़ से होकर ग्रामीण शव को श्मशान तक ले गए. वहां शेड तक न होने के कारण बारिश की बूंदों से बचाने के लिए शव के ऊपर ग्रामीणों ने घर से लाई टूटी-फूटी चद्दरों को पकड़ लिया. यह दृश्य केवल गांव की लाचारी नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की नाकामी को उजागर करता है. गौरतलब है कि नानकपुर गांव की आबादी लगभग एक हजार है. लेकिन यहां अंतिम संस्कार की मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं. श्मशान घाट तक जाने के लिए सिर्फ कच्चा रास्ता है, जो बारिश में नाले के पानी से भर जाता है. श्मशान में बैठने की कोई व्यवस्था नहीं, जो टीन शेड पहले से था उसकी चद्दरें भी टूट चुकी हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे हैं और जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासन तक को अवगत कराते रहे, लेकिन समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया.
ग्रामीण प्रदीप कुशवाहा, जीवन धनगर और अन्य लोगों ने बताया कि गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं. ऐसे में ग्रामीणों में आक्रोश पनपता जा रहा है. क्योंकि गांवों में विकास केवल कागजों में दिखता है, जबकि जमीनी स्तर पर गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. चुनावी वादे तो किए जाते हैं लेकिन जीतने के बाद कोई नेता लौटकर नहीं आता. ग्रामीण साफ शब्दों में कहते हैं कि यह केवल सुविधा की मांग नहीं बल्कि मृतकों के सम्मान की लड़ाई है. यदि प्रशासन अब भी नहीं जागा तो ग्रामीणों को आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा.
विधायक बोले 10-12 गांवों में स्थिति खराब है
आष्टा विधायक भी इस बात को मानते हैं कि आष्टा क्षेत्र में 10 से 12 गांवों में श्मशान घाट की स्थिति बहुत खराब है. बावजूद इसके अब तक इन श्मशान घाटों की सुध किसी ने नहीं ली है. विधायक गोपाल इंजीनियर ने बताया कि नानकपुर सहित 10-12 गांवों में श्मशान घाट की स्थिति बहुत खराब है. जनपद पंचायत के माध्यम से इसका एस्टीमेट तैयार कराया जा रहा है और प्राथमिकता के आधार पर टीन शेड और अन्य सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएंगी. वहीं जनपद पंचायत सीईओ अमित व्यास ने भी सभी गांवों से जानकारी एकत्रित कर रिपोर्ट तैयार करने की बात कही.
