
मंडला।जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल मंडरा रहा है—आधी रात को अचानक तबीयत खराब होने पर आखिर इलाज के लिए लोग कहां जाएं ? शहर के विभिन्न मोहल्लों और कस्बों में आए दिन जबलपुर से आने वाले कथित डॉक्टर मेडिकल स्टोरों के पीछे बने छोटे कमरों में इलाज का धंधा जमाए बैठे हैं। यह डॉक्टर किसके संरक्षण में खुलेआम मरीजों की जिंदगी से खेल रहे हैं, यह बड़ा सवाल है।
मंडला के कई क्षेत्र में मेडिकल दुकानों के पीछे अलग कमरे में इन बाहरी डॉक्टरों की रोजाना ‘क्लिनिक’ सजती है। मरीजों को सस्ते इलाज का लालच देकर यह डॉक्टर रात के समय भी पहुंचने का दावा करते हैं, जबकि इनके पास न तो यहां का पंजीयन है और न ही आपातकालीन इलाज की सुविधा। मेडिकल स्टोर संचालक इनके लिए बाकायदा जगह उपलब्ध कराते हैं और रात में दवा की ओपीडी चलती रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जबलपुर से आने वाले ये डॉक्टर मोटी फीस वसूल कर इंजेक्शन और दवा देकर चले जाते हैं। इलाज के नाम पर 300 से 500 रुपये तक वसूले जाते हैं, और गंभीर मरीजों को बिना किसी जांच के दवा थमा दी जाती है। मरीजों की हालत बिगड़ने पर इन्हें तत्काल बड़े अस्पताल रेफर कर दिया जाता है ।
जनता का सवाल है कि जब जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद हैं, तो फिर ये डॉक्टर किनके आशीर्वाद से मंडला में धड़ल्ले से इलाज का खेल खेल रहे हैं? क्या प्रशासन को इनकी जानकारी नहीं है ? दवा बेचने का लाइसेंस किसने दिया और मेडिकल दुकानदार ऐसे लोगों को शरण क्यों दे रहे हैं ?
रात के अंधेरे में मेडिकल स्टोर के पीछे चल रही इस गुप्त ओपीडी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमजन का कहना है कि अगर आधी रात को कोई गंभीर मरीज हुआ तो क्या यह ‘जबलपुर डॉक्टर मंडली’ जिम्मेदारी लेगी? जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कब जागेगा और कब इन पर लगाम लगाएगा, यह देखने वाली बात है।
इनका कहना
जिले में अगर कोई डॉक्टर विजिट के लिए किसी पंजीकृत संस्थान में आते हैं तो संस्थान की तरफ से हमारे कार्यालय में डॉक्टर के आने की सूचना देना अनिवार्य है अगर ऐसा नहीं पाया जाता तो उचित कार्यवाही की जाएगी ।
डॉ डी जे मोहंती
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मंडला
