सतना : जिला अस्पताल परिसर से सटे रेडक्रॉस मेडिकल स्टोर नामक प्रतिष्ठान के विरुद्ध गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं. छूट दिए जाने के नाम पर ऐसी दवाएं बेची जा रही हैं जो न सिर्फ ब्रांडेड दवाओं से भी मंहगी होती हैं बल्कि वे किसी काम की नहीं होतीं. वह भी तब जबकि इस मेडिकल स्टोर को टैक्स में छूट मिलती है.शहर के भरहुत नगर क्षेत्र के निवासी 40 वर्षीय युवक और पेशे से इंजीनियर अभिनव सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दिनों उन्हें बुखार और शरीर में दर्द की समस्या शुरु हुई थी.
जिसके चलते उन्होंने एक निजी क्लीनिक में चिकित्सक को दिखाया. जांच में वाइरल फीवर की पुष्टि होने पर चिकित्सक द्वारा एंटीबायोटिक, एंटासिड और दर्द-बुखार की दवाएं लिखी गईं. चूंकि जिला अस्पताल परिसर से सटे प्रतिष्ठान रेडक्रॉस मेडिकल द्वारा कम से कम 10 प्रतिशत की छूट का दावा किया जाता है. लिहाजा वे दवा लेने के लिए उक्त दुकान पर चले गए.
लेकिन वहां पर पर्चे पर लिखी दवाओं के बजाए दूसरे नाम की दवाएं थमा दी गईं. दवाओं के सेवन के बावजूद भी जब उन्हें उपेक्षित आराम नहीं मिला तो उन्होंने फिर से चिकित्सक से संपर्क किया. जब चिकित्सक ने दवाओं को देखा तो कहा उन्होंने से तो सभी दवाएं ब्रांडेड कंपनियों की लिखी थीं. लेकिन मेडिकल स्टोर से दी गई दवाएं न सिर्फ ब्रांडेड से भी मंहगी हैं बल्कि उनका प्रदर्शन भी औसत से नीचे है. जिसे देखते हुए अभिनव ने दूसरे मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदीं और कुछ समय बाद ही उन्हें आराम होने लगा.
छूट के नाम पर लूट..?
अभिनव के अनुसार अनजान कंपनी की ब्रांडेड से भी मंहगी दवाओं के नाम पर रेडक्रॉस मेडिकल ने उनसे 1600 रु ऐंठ लिए. हलांकि रेडक्रॉस मेडिकल द्वारा छूट के नाम पर लूट किए जाने को लेकर उनके कई मित्रों द्वारा पहले भी बताया गया था. लेकिन इसके बावजूद भी वे छूट के चुंगल में फंस गए. यह घटना तो एक बानगी भर है जिसमें एक पढ़े लिखे शक्स के साथ छल किया गया. जबकि उक्त दुकान में छूट के नाम पर हर रोज खासी संख्या में पहुंचने वाले ग्रामीणों का तो और भी अधिक आर्थिक शोषण किया जाता है. लिहाजा टैक्स में छूट मिलने के बावजूद भी मरीज और उनके परिजनों को ब्रांडेड से कहीं अधिक मंहगी, लेकिन औसत दर्जे की दवाएं बेचना किसी अपराध से कम नहीं माना जा सकता
