नयी दिल्ली 18 फरवरी (वार्ता) समुद्र के रास्ते दुनिया का चक्कर लगाने के अभियान पर निकली भारतीय नौसेना की दो जांबाज अधिकारियों ने अपनी नौका तारिणी में मंगलवार को शाम सवा पांच बजे पोर्ट स्टेनली में प्रवेश किया इसके साथ ही नाविका सागर परिक्रमा – दो का तीसरा और सबसे चुनौतीपूर्ण चरण पूरा हो गया।
नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि यह दुनिया भर में यात्रा करने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस चरण के दौरान पोत ने तीन चक्रवातों का सामना किया, जबकि वह प्वाइंट निमो से गुज़र रहा था जिसे दुर्गमता का महासागरीय ध्रुव कहा जाता है। वे केप हॉर्न को पार करने से पहले ड्रेक पैसेज के खतरनाक पानी से भी गुज़रे। नाविका सागर परिक्रमा पहल भारतीय नौसेना की लैंगिक सशक्तिकरण और समुद्री उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। दो महिला अधिकारियों द्वारा संचालित इस अभियान का उद्देश्य समुद्री नौकायन, आत्मनिर्भरता और भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को बढ़ावा देना है। उनके अनुभव युवा आकांक्षियों के लिए प्रेरणा का काम करते हैं, जो समुद्री और रक्षा क्षेत्रों में महिलाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं।
तारिणी ने गत दो अक्टूबर को गोवा से अपनी महत्वाकांक्षी यात्रा शुरू की, जो हिन्द , अटलांटिक और प्रशांत महासागरों में चुनौतीपूर्ण समुद्री परिस्थितियों को पार करते हुए आगे बढ़ी। पोर्ट स्टेनली में पोत का सुरक्षित आगमन भारत की बढ़ती समुद्री पहुंच और नौसेना कूटनीति के माध्यम से वैश्विक सद्भावना को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन है।
पोर्ट स्टेनली में पड़ाव के बाद तारिणी भारत लौटने से पहले केप टाउन तक नौकायन करते हुए अपना अभियान जारी रखेगी। यह अभियान साहसिकता, लचीलेपन और वैश्विक समुद्री सहयोग को बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की भावना को मजबूत करता है।
