लंदन, 19 सितंबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर को सुझाव दिया है कि वह अवैध प्रवासन को रोकने के लिए सेना का इस्तेमाल कर सकते हैं।
श्री ट्रम्प की ब्रिटेन की दूसरी राजकीय यात्रा के समापन पर यहाँ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि श्री कीर के साथ प्रवासन के मुद्दों पर चर्चा की।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिका में सीमाओं को सुरक्षित करने की अपनी नीतियों के बारे में बात की और कहा कि ब्रिटेन को भी छोटी नावों में इंग्लिश चैनल पार करने वाले प्रवासियों के कारण इसी तरह की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
श्री ट्रम्प ने कहा, “लोग आ रहे हैं और मैंने प्रधानमंत्री से कहा है कि मैं इसे रोकूँगा, और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप सेना को बुलाते हैं या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस माध्यम का इस्तेमाल करते हैं।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर से आव्रजन के खिलाफ “कड़ा रुख” अपनाने का आग्रह किया और कहा कि इससे उन्हें “बहुत नुकसान” हो रहा है।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बोलते हुए श्री ट्रंप ने कहा कि अवैध आव्रजन “देशों को अंदर से नष्ट कर देता है और हम वास्तव में अब अपने देश में आए बहुत से लोगों को निकाल रहे हैं।” श्री ट्रंप ने कहा कि अवैध प्रवासियों के निर्वासन में तेज़ी लाई है और अवैध सीमा पार करने वालों पर नकेल कसी है।
राष्ट्रपति और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद एयर फ़ोर्स वन से स्टैनस्टेड हवाई अड्डे से ब्रिटेन के लिए रवाना हुए।
ब्रिटेन और अमेरिका के पत्रकारों के साथ विस्तृत प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान, दोनों ने ब्रिटेन और अमेरिका के बीच “विशेष संबंधों” का बखान किया और एक नए तकनीकी समझौते की घोषणा की।
श्री ट्रंप ने कहा कि इससे सहयोगियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की दुनिया में “प्रभुत्व” हासिल करने में मदद मिलेगी। श्री ट्रम्प ने हालांकि फ़िलिस्तीनी के विषय पर “प्रधानमंत्री से अपनी असहमति” व्यक्त की।
प्रधानमंत्री कीर अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले फ़िलिस्तीनी देश को मान्यता देने की योजना बना रहे हैं। फ़िलिस्तीन को कुछ अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है लेकिन इसकी कोई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत सीमाएँ, कोई राजधानी और कोई सेना नहीं है।
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से 147 ने फ़िलिस्तीन को मान्यता दी है। इस सूची में शामिल होकर ब्रिटेन एक मज़बूत राजनीतिक संदेश देगा, हालाँकि यह काफ़ी हद तक प्रतीकात्मक होगा।
