
मंडला। मंडला शहर में करोड़ों की लागत से बिछाई जा रही सीवरेज लाइन आमजन के लिए मुसीबत बन गई है। करीब चार साल से चल रहे 140 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट का निर्माण घटिया स्तर का होने के कारण शहर की सड़कों, मोहल्लों और घरों में गंदा पानी भरने की स्थिति बन रही है। जगह-जगह बने चैम्बरों से सीवरेज का पानी बाहर निकल रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र में करीब आठ हजार से अधिक मकान और 59 हजार से ज्यादा आबादी है। नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए इस प्रोजेक्ट को अगले 30 साल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि एमपीयूडीसी के तकनीकी अफसरों की मिलीभगत से न तो समय पर जांच हुई और न ही शिकायतों पर कोई सुधार कार्य।
चैम्बर और पाइपलाइन में घटिया सामग्री का उपयोग
वार्डों में बिछाई गई सीवरेज लाइन पर बनाए गए चैम्बरों में कमजोर ईंट और हल्के ढक्कन लगाए गए हैं। बाइक या हल्के वाहन का भार तक सहन न कर पाने के कारण ढक्कन टूट रहे हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई जगह चैम्बर सड़क से ऊपर या नीचे बनाए जाने से गड्ढे बन गए हैं। घरों से जोड़े गए कनेक्शनों में भी निम्न गुणवत्ता के पाइप लगाए गए हैं।
गौंझी एसटीपी में भी मनमानी
घरों से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए गौंझी में 7.75 एमएलडी क्षमता का एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया जा रहा है, लेकिन यहां भी निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई है। भवन में इस्तेमाल ईंट और कंक्रीट का मटेरियल पहले से ही टूटने लगा है, जिससे आने वाले वर्षों में महंगी मरम्मत की नौबत आ सकती है।
वार्डों की सड़कों का बुरा हाल
सारदार पटेल वार्ड, सुभाष वार्ड, हाऊसिंग बोर्ड, देवदरा, पड़ाव, स्वामी सीताराम वार्ड सहित कई इलाकों की सीसी सड़कों को सीवरेज लाइन डालने के लिए तोड़ा गया, लेकिन अब तक उनका मरम्मत कार्य नहीं हुआ है। कहीं-कहीं सिर्फ मिट्टी और डस्ट डालकर कामचलाऊ पैचवर्क किया गया, जो बरसात में बह जाता है। इससे आमजन की आवाजाही खतरनाक हो गई है।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
लोगों का कहना है कि एमपीयूडीसी के अधिकारियों को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। ठेकेदार द्वारा मनमानी और निकाय की अनदेखी से यह पूरा प्रोजेक्ट जनता के लिए सिरदर्द बन चुका है। अब आवश्यकता है कि शासन-प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे, ताकि करोड़ों की लागत से बने इस प्रोजेक्ट को बचाया जा सके और शहर को गंदगी व दुर्घटनाओं से राहत मिले।
