इंदौर: शादी के बाद लगातार अत्याचार झेलने पर शहर की एक महिला मायके लौट आई थी. घरेलू हिंसा, गला दबाकर मारने की कोशिश और बच्ची को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोपों के बीच अदालत ने पीड़िता को बड़ी राहत देते हुए एकमुश्त राशि के साथ हर माह भरण-पोषण दिए जाने का आदेश सुनाया. पति द्वारा आर्थिक तंगी का हवाला देने पर कोर्ट ने उसकी आय-व्यवस्था और संपत्ति के रिकॉर्ड की जांच की और कहा कि पत्नी-बेटी की जिम्मेदारी से वह पीछे नहीं हट सकता.
महिला की शादी वर्ष 2016 में गुजरात के एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी से हुई थी. शादी के कुछ समय बाद से ही शराब के नशे में मारपीट, गला दबाने और बच्ची को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं होने लगीं. बढ़ते अत्याचारों से परेशान होकर महिला मायके इंदौर लौट आई और अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से भरण-पोषण का प्रकरण दायर किया. सुनवाई के दौरान पति ने दावा किया कि उसका कारोबार घाटे में है और वह आर्थिक रूप से भरण-पोषण देने में सक्षम नहीं है.
लेकिन अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों में नौ माह में करीब 37 लाख के कारोबार का विवरण सामने आया. साथ ही लगभग 60 लाख के हाउसिंग लोन और उसकी मासिक किश्तों की जानकारी भी दर्ज थी. अदालत ने टिप्पणी की कि नाबालिग बेटी की परवरिश और पत्नी के जीवन-यापन की जिम्मेदारी पति की है, जबकि पीड़िता के पास कोई आय का साधन नहीं है. उपलब्ध रिकॉर्ड और आय के आधार पर कोर्ट ने हर माह 40 हजार रुपए पत्नी को और 30 हजार रुपए बेटी के लिए देने का आदेश दिया. इसके साथ ही करीब ढाई वर्ष की अवधि का 21 लाख रुपए एकमुश्त जमा कराने के निर्देश भी दिए गए. प्रकरण में अधिवक्ता केपी माहेश्वरी, प्रतीक माहेश्वरी, अमृता सोनकर, पवन तिवारी और सुनील यादव ने पैरवी की.
