कोलकाता / नयी दिल्ली 16 सितम्बर (वार्ता) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शीर्ष सैन्य कमांडरों से गैर परंपरागत खतरों के कारण उत्पन्न होने वाली सूचना, वैचारिक और जैविक युद्ध जैसी अदृश्य चुनौतियों से युद्ध की पारंपरिक अवधारणाओं से परे जाकर निपटने को तैयार रहने को कहा है।
श्री सिंह ने मंगलवार को कोलकाता में संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन में शीर्ष सैन्य कमांडरों को संबोधित किया।
बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा ,”कोलकाता में आयोजित संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित किया। सशस्त्र बलों के वरिष्ठ नेतृत्व को युद्ध की पारंपरिक अवधारणाओं से परे जाने और गैर परंपरागत खतरों से निपटने के लिए तैयार होने के लिए प्रेरित किया। पूरे राष्ट्र के दृष्टिकोण के अनुरूप, सशस्त्र बलों के साथ -साथ अन्य एजेंसियों के साथ संयुक्तता और तालमेल के महत्व पर प्रकाश डाला। भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए यह दृष्टिकोण आवश्यक है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण है, यह आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है, रोजगार उत्पन्न करता है और क्षमता को बढ़ाता है।”
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रक्षा मंत्री ने दुनिया भर में हो रहे बदलावों और अशांत वैश्विक व्यवस्था, क्षेत्रीय अस्थिरता तथा उभरते सुरक्षा परिदृश्य के मद्देनजर देश की सुरक्षा प्रणाली पर इसके प्रभाव के निरंतर मूल्यांकन की आवश्यकता पर जोर दिया।
श्री सिंह ने कहा कि युद्ध की प्रकृति लगातार बदल रही है और हाल के वैश्विक संघर्षों ने ‘प्रौद्योगिकी से लैस’ सेना की प्रासंगिकता के महत्व को उजागर किया है। उन्होंने कहा, ” आज के युद्ध इतने अचानक और अप्रत्याशित हैं कि इनकी अवधि का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है। यह दो महीने, एक वर्ष या पांच साल तक हो सकता है। हमें तैयार रहने की आवश्यकता है। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हमारी क्षमता में कमी न आने पाये। ”
भारत के रक्षा क्षेत्र को आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का समावेश बताते हुए रक्षा मंत्री ने कमांडरों से अपने दृष्टिकोण में सक्रिय रहने का आह्वान किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कल्पना के अनुरूप ‘सुदर्शन चक्र’ बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की जांच और इसके लिए ‘यथार्थवादी कार्य योजना’ तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे अंजाम तक पहुंचाने के उद्देश्य से अगले पांच वर्षों के लिए एक मध्यम अवधि की योजना और अगले दस वर्षों के लिए एक दीर्घकालिक योजना बनायी जानी चाहिए।
रक्षा मंत्री ने देश में रक्षा क्षेत्र को आधुनिकीकरण, संचालन तत्परता, प्रौद्योगिकी और विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता पर केंद्रित बताते हुए कमांडरों से सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में दिये गये प्रधान मंत्री नरेंद्र के ‘जय’ यानी एकजुटता, आत्मनिर्भरता और नवाचार के मंत्र पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने मजबूत रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने , घरेलू उद्योग को दुनिया में सबसे बड़ा और सबसे अच्छा बनाने में निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ाने पर भी बल दिया।
श्री सिंह ने सशस्त्र बलों के साथ -साथ अन्य एजेंसियों के साथ एकजुटता और तालमेल के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्र के दृष्टिकोण के अनुरूप इसे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी बताया। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में एकीकरण और संयुक्तता को बढ़ावा देने के लिए तीनों सेनाओं के ‘लॉजिस्टिक्स नोड्स’ और”लॉजिस्टिक मैनेजमेंट एप्लिकेशन’ का भी उल्लेख किया।
रक्षा मंत्री ने कहा , ” ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया है कि ताकत, रणनीति और आत्मनिर्भरता तीन ऐसे स्तंभ हैं जो भारत को 21 वीं शताब्दी में उसे जरूरी शक्ति प्रदान करेंगे। आज, हमारे पास स्वदेशी प्लेटफार्मों और प्रणालियों की मदद से किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है, जो हमारे सैनिकों के अदम्य साहस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ”
आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए श्री सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता एक नारा नहीं , बल्कि एक आवश्यकता है, जो रणनीतिक स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है, रोजगार पैदा हो रहा है, शिपयार्ड, एयरोस्पेस समूहों और रक्षा गलियारों की क्षमता बढ रही है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा खरीद नियमावली को मंजूरी देने का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है। उन्होंने कहा कि रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 को संशोधित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना , देरी को कम करना , और बलों को जल्दी से संचालन शक्ति प्रदान करना है।
इस अवसर पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी , सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी , वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह , रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) श्री संजीव कुमार और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
