हरित विमान ईंधन के लिए डीजीसीए तैयार कर रहा है अपना रोडमैप

नयी दिल्ली, 15 सितंबर (वार्ता) नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) हरित विमान ईंधन को अपनाने की तैयारी के लिए अपना रोड मैप विकसित कर रहा है जो स्थानीय जरूरतों के हिसाब से होगा।

डीजीसीए के संयुक्त महानिदेशक मनीष कुमार ने यहां सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा कि वैश्विक स्तर पर कार्बन डाई-ऑक्साइड के उत्सर्जन में विमानन क्षेत्र का योगदान दो से चार प्रतिशत के बीच है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए कई तरह के उपाय किये जा रहे हैं और हरित विमान ईंधन (एसएएफ) उन्हीं में से एक है।

श्री कुमार ने कहा,”डीजीसीए हरित विमान ईंधर पर अपना एक रोडमैप तैयार कर रहा है। यह एक अच्छा दस्तावेज है जिसे जल्द ही उद्योग के साथ चर्चा के लिए जारी किया जायेगा ताकि वे इस पर अपनी राय दे सकें।”

उल्लेखनीय है कि भारत ने साल 2027 तक एक प्रतिशत हरित विमान ईंधन मिश्रण का लक्ष्य रखा है। साल 2028 तक इसे बढ़ाकर दो प्रतिशत और साल 2030 तक पांच प्रतिशत करने का लक्ष्य है।

एसएएफ एसोसिएशन द्वारा आयोजित अधिवेशन में उन्होंने कहा कि एसएएफ का उत्पादन सीमित है, इसलिए दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसमें कार्बन कैप्चर भी एक है। ऊर्जा और पानी की खपत कम करने, हरियाली बढ़ाने जैसे उपाय किया जा रहे हैं। बेड़े की दक्षता बढ़ायी जा रही है।

उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स, सही अनुपात में मिश्रण और टेस्टिंग में प्रक्रियागत बाधाएं हैं। एक परियोजना में तीन साल से अधिक का समय लग गया। इस अवधि को कम करने की आवश्यकता है।

डीजीसीए अधिकारी ने बताया कि अगले दो दशक में देश की विमान सेवा कंपनियों के बेड़े में 2,500 से अधिक विमान बढ़ेंगे। उस हिसाब से तैयारी की आवश्यकता है।

इस अवसर पर एसएएफ एसोसिएशन और डिलॉयट द्वारा जारी एक साझा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में हवाई यात्रियों की संख्या 10 प्रतिशत सालाना के औसत से बढ़ते हुए 2030 तक 39 करोड़ पर पहुंच जायेगी। वहीं, हवाई मार्ग से माल ढुलाई भी हर साल 13 प्रतिशत की औसत दर बढ़ती हुई साल 2030 तक 24 लाख टन पर पहुंच जायेगी। इससे विमान ईंधन की खपत 82 लाख टन से बढ़कर 15-16 लाख टन पर पहुंचने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने में हरित विमान ईंधन अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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