
मंदसौर/नाहरगढ। मंदसौर यूनिवर्सिटी बी.आर. नाहटा कॉलेज ऑफ फार्मेसी में बोर्ड ऑफ रिसर्च इन न्यूक्लियर साइंस के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का विषय टार्गेटेड अल्फा थेरेपी (टी ए टी) एडवांसेस एंड चैलेंजेस इन न्यूक्लियर मेडिसिन रहा। इसमें देश और विदेश से आए विशेषज्ञों ने परमाणु चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम प्रगति और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
सम्मेलन में वैज्ञानिकों और चिकित्सकों ने रेडियोन्यूक्लाइड उत्पादन, डोसिमेट्री, टीएटी विनियमन, नैदानिक एवं अनुसंधान अनुप्रयोगों पर अपने अनुभव और शोध कार्य प्रस्तुत किए। साथ ही प्रश्नोत्तर सत्र और पैनल डिस्कशन के माध्यम से शोधकर्ताओं एवं पेशेवरों को नेटवर्किंग का अवसर मिला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. संदीप सिगांई (हेड वैज्ञानिक, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद, एएमपीआरआई), डॉ. करण पिपरी (एमडी, न्यूक्लियर मेडिसिन, पारुल यूनिवर्सिटी, वडोदरा) और डॉ. वी.पी. पाण्डे (कार्यकारी वैज्ञानिक, बी ए आर सी एवं प्रोफेसर, एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा) रहे।
डॉ. सिगांई ने बताया कि सीएसआईआर देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के संवर्धन और संसाधनों के उन्नयन में निरंतर योगदान दे रहा है।
डॉ. पिपरी ने न्यूक्लियर मेडिसिन को एक विशिष्ट चिकित्सा विशेषज्ञता बताते हुए कहा कि इसमें रेडियोधर्मी पदार्थों के माध्यम से रोगों का निदान और उपचार किया जाता है।
वहीं डॉ. पाण्डे ने परमाणु चिकित्सा को ऐसी प्रौद्योगिकी करार दिया, जो रेडियोधर्मी समस्थानिकों की सहायता से मानव शरीर के आंतरिक अंगों की इमेजिंग संभव बनाती है। इस अवसर पर मंदसौर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति नरेन्द्र नाहटा, कार्यकारी अध्यक्ष राहुल नाहटा, कुलपति प्रो.(डॉ.) वी.एस.एस. कुमार, कुलसचिव आशिष पारिख, डीन अकादमिक्स अनुरवा दास, प्राचार्य डॉ. रुपेश सोनी सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ मौजूद रहे।
सम्मेलन के सफल आयोजन में संयोजक डॉ. अनुप कुमार चक्रब्रोति, समन्वयक डॉ. नवीन कुमार चौधरी एवं डॉ. लक्ष्मीनारायण पाटीदार की भूमिका सराहनीय रही।
कार्यक्रम में डॉ. स्वप्निल गोयल, डॉ. विशाल सोनी, डॉ. प्रियंका सोनी, डॉ. एम.ए. नायडु सहित अनेक शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही।
मीडिया प्रभारी डॉ. दीपक जैन ने बताया कि यह सम्मेलन न केवल प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, बल्कि न्यूक्लियर मेडिसिन के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं पर भी नई दृष्टि प्रदान करने वाला रहा।
