ट्रम्प ने सैन्य हस्तक्षेप से पहले ईरान को वार्ता के लिये दो सप्ताह का समय दिया

वाशिंगटन, 20 जून (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह ईरान- इजरायल संघर्ष में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से पहले ईरान को बातचीत शुरू करने के लिए हो हफ्ते का समय देंगे।

सीएनएन की एक खबर के मुताबिक व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि श्री ट्रम्प के सख्त रुख और ईरान के मिसाइल संबंधी बुनियादी ढांचे पर इजरायल के लगातार हमलों के मद्देनजर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू होने की संभावना है। इजरायल का दावा है कि उसके हमलों में तेहरान में ईरान की दो तिहाई मिसाइल लॉचिंग क्षमता नष्ट हो गयी है।

दूसरी ओर ईरान ने अपने रूख से एक इंच भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है। उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका द्वारा इस युद्ध में कूदने पर उसे गंभीर नतीजों की चेतावनी दी है। उधर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट द्वारा पढ़े गए एक बयान में कहा गया कि ईरान के साथ “बातचीत की पर्याप्त संभावना” है। हालांकि उन्होंने इस बाबत कुछ भी पुष्टि नहीं की।

इस बीच सीबीएस न्यूज़ ने बताया है कि श्री ट्रम्प ने ईरान पर हमला करने की योजना को मंजूरी दे दी है और सैन्य आपूर्ति को पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों की तरफ रवाना कर दिया है। लेकिन उन्होंने अभी तक यह तय नहीं किया है कि सैन्य हमले करने हैं या नहीं। वे कथित तौर पर फोर्डो कॉम्पलेक्स में ईरान की भूमिगत यूरेनियम संवर्धन सुविधा पर हमला करने पर विचार कर रहे हैं जहां सैन्य कार्रवाई बहुत कठिनाई भरी है।

फोर्डो कॉम्प्लेक्स उत्तरी ईरान के ऊबड़-खाबड़, दुर्गम पहाड़ों के भीतर बनाया गया है और इसे हवाई हमलों का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। साथ ही इसकी भूमिगत स्थिति इसे परम्परागत तरीको से बनाए गए बमों से बचाती है। इजरायली सेना की क्षमताओं के बावजूद फोर्डो कॉम्प्लेक्स इजरायली सैन्य बलों के लिए एक बहुत ही अनोखी चुनौती पेश करता है क्योंकि इसकी भूमिगत सुविधाएँ बहुत गहरी हैं। फोर्डो प्लांट को कोई भी महत्वपूर्ण नुकसान पहुँचाने के लिए इसे “बंकर बस्टर” प्रणाली से निशाना बनाया जाना चाहिए जो सतह के नीचे गहराई तक घुसने में सक्षम हो। इज़राइल के पास हालांकि भूमिगत बंकरों को नष्ट करने के लिए संसाधन हैं लेकिन उसके पास फ़ोर्डो प्लांट जैसे परिसर को नष्ट करने के लिए आवश्यक बमबारी वाली क्षमताएँ नहीं हैं।

हालाँकि माना जाता है कि अमेरिका के पास एक बम जीबीयू 57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (एमओपी) बम है जो 61 मीटर गहराई तक हमला कर यह काम कर सकता है। लेकिन यह भी फ़ोर्डो को नष्ट करने में नाकाम हो सकता है क्योंकि वहां सुरंगें सतह से 80-90 मीटर तक नीचे हैं।

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