जबलपुर: प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी शुभांगी पालो की अदालत ने सीलिंग पीडि़त किसानों के प्रदर्शन में पुलिस की आंख में मिर्च झोंकने के आरोपित नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच जबलपुर के प्रांताध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे, राजेंद्र पटेल, शंभू प्रसाद मिश्रा व विनोद पटेल को दोषमुक्त कर दिया।आरोपियोंं की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र गुप्ता ने पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी कि डॉ. नाजपांडे के नेतृत्व में सीलिंग पीडि़त किसानों द्वारा 20 जनवरी, 2013 को मुख्यमंत्री के समक्ष करौंदा नाला में प्रदर्शन किया जा रहा था। काले झंडे दिखाने की तैयारी थी। पुलिस और जिला प्रशासन उक्त प्रदर्शन को नहीं होने देना चाह रहे थे। किसान अपनी मांगों पर अडिग थे और प्लेकार्ड लेकर नारेबाजी कर रहे थे। तभी अधारताल की पुलिस ने आंदोलन को कुचलने की नीति बनाई।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियोंव जिला प्रशासन के निर्देश पर आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग किया गया। उनके बैनर, पोस्टर, साउंड बाक्स को जप्त कर लिया गया। साथ ही डॉ. पीजी नाजपांडे, राजेंद्र पटेल, शंभू मिश्रा, विनोद पटेल सहित अन्य पर पुलिस टूट पड़ी। इसके बावजूद आंदोलनकारियों पर पुलिस के साथ झूमाझटकी, पुलिस की आंखों में मिर्ची पाउडर डालने, बलवा करने, शांतिभंग करने का अपराध पंजीबद्ध करके गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
आंदोलनकारी विगत 12 वर्षों से पुलिस के द्वारा की गई कार्यवाही का न्यायालय में सामना कर रहे थे। आंदोलनकारियों की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र गुप्ता, गुरु साहू, भावना चौधरी, रुचिरा गुप्ता ने पैरवी की और कोर्ट को अवगत कराया कि आंदोलनकारी किसान हैं, सीलिंग पीडि़त हैं और वर्षों से अपनी जमीन को सीलिंग से मुक्त कराने के लिए आन्दोलन कर रहे हैं, उनका कोई आपराधिक रिका र्ड नहीं है.
वह शांतिपूर्ण एव लोकतांत्रिक तरीके से आन्दोलन कर रहे थे, उन पर जिला एवं पुलिस प्रशासन ने झूठे आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया है। अभियोजन अपने आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है। आरोपियों से किसी प्रकार की कोई जप्ती नही की गई है, अत: उन्हें दोषमुक्त किया जाए। अदालत ने तर्क स्वीकार कर राहतकारी आदेश पारित कर दिया।
