नयी दिल्ली 12 सितम्बर (वार्ता) रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने निरंतर बदल रही भू-राजनैतिक परिस्थितियों में सशस्त्र बलों की संचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योग और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) जैसे अनुसंधान संस्थानों तथा शिक्षा जगत के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है। श्री सिंह ने शुक्रवार को पुणे में दक्षिणी कमान द्वारा ‘प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का तालमेल’ विषय पर आयोजित सेमिनार ‘स्ट्राइड 2025 ‘ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ज़ोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे बदलाव न केवल युद्ध की प्रकृति, बल्कि उद्योग जगत के व्यवसाय को भी तेज़ी से बदल रहे हैं। इसे देखते हुए उन्होंने सभी हितधारकों से नवीनतम प्रौद्योगिकी से लैस रहने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
रक्षा सचिव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में श्रेष्ठता और औद्योगिक शक्ति अक्सर युद्ध के परिणाम निर्धारित करती हैं, और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि रक्षा उद्योग देश के शेष विनिर्माण क्षेत्र के साथ गति से बढ़े ताकि विकसित भारत और 2047 तक 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा, ” यह परिवर्तन नवाचार के क्षेत्र में विकसित राष्ट्र बनने, भारत की स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने, औद्योगिक आधार का विस्तार करने, सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी बढ़ाने और रोज़गार सृजन तथा प्रौद्योगिकी के दोहरे उपयोग से होने वाले अतिरिक्त लाभों के व्यापक मुद्दे के लिए महत्वपूर्ण है।”
श्री सिंह ने बताया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रहे संघर्षों के परिणामस्वरूप दुनिया भर में प्रतिस्पर्धी लोकलुभावनवाद और आर्थिक संरक्षणवाद को बढ़ावा मिला है, साथ ही आर्थिक विखंडन, बहुपक्षीय संस्थानों का पतन और राष्ट्रवाद की बढ़ती लहर भी देखी गई है। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा, ” हमारी सॉफ्ट पावर का समर्थन करने की आवश्यकता है क्योंकि हार्ड पावर अधिक से अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।”
रक्षा सचिव ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ज़िक्र किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश प्रौद्योगिकी की दौड़ में आगे रहे। इन उपायों में रक्षा खरीद नियमावली 2009 और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में संशोधन शामिल है ताकि उन्हें अधिक गतिशील, सक्रिय, सरल और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सके। उन्होंने कहा, ” निजी क्षेत्र और स्टार्ट-अप के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करने, जमीनी स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहित करने और प्रतिस्पर्धी बोली सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को व्यापक और विविध बनाना है।”
रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने और इसे आत्मनिर्भर बनाने में निजी उद्योग की भूमिका की सराहना करते हुए श्री सिंह ने उनसे अनुसंधान एवं विकास तथा विनिर्माण क्षमता में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि जब तक निजी क्षेत्र में आगे बढ़ने और निवेश करने की इच्छाशक्ति नहीं होगी, तब तक रक्षा क्षेत्र सशस्त्र बलों को आवश्यक नवाचार और क्षमता का वह स्तर प्राप्त नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा, ‘ रक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आपको छिटपुट आधार पर ऑर्डर मिलते हैं, लेकिन अगर आपके पास तकनीक और इंजीनियरिंग की क्षमता है, तो आप घरेलू और निर्यात ऑर्डर के संयोजन के माध्यम से खुद को बनाए रख पाएंगे।”
