मप्र में गन कल्चर पर ब्रेक: 21 महीने की सरकार में सिर्फ दो को लाइसेंस

(आशीष कुर्ल) भोपाल: मध्यप्रदेश में रिवॉल्वर और पिस्तौल रखना लंबे समय से एक स्टेटस सिंबल माना जाता रहा है, खासकर युवाओं के बीच। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने इस प्रवृत्ति पर सख्त रोक लगाते हुए हालात बदल दिये हैं। पिछले 21 महीनों में महज दो लोगों को ही हथियार का लाइसेंस जारी किया गया है, जो सरकार की कड़े रुख की ओर इशारा करता है।

गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव जो खुद गृह मंत्री भी हैं, ने साफ कर दिया है कि शौक या प्रतिष्ठा दिखाने के लिए अब लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे। केवल उन्हीं आवेदनों पर विचार होगा, जिनमें आत्मरक्षा की वास्तविक आवश्यकता सिद्ध हो। वह भी गहन जांच-पड़ताल के बाद। इसके चलते पुरानी लंबित फाइलें लौटा दी गई हैं और जिलों को नए प्रस्ताव आगे न बढ़ाने के निर्देश दिये गये हैं।

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में रायफल और 12 बोर बंदूक के लाइसेंस पर भी सख्ती की जाएगी, जबकि पहले यह जिला कलेक्टर की अनुशंसा पर आसानी से मिल जाता था। ग्वालियर, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में तो राजनीतिक दबाव और सिफारिशों से बड़े पैमाने पर लाइसेंस जारी होते रहे हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में इस समय 2.84 लाख लाइसेंसी हथियार हैं। ग्वालियर 34,000 से अधिक लाइसेंस के साथ सबसे ऊपर है, जबकि मुरैना में 29,650 और भिंड में 26,650 लाइसेंस दर्ज हैं। राजधानी भोपाल में 9,974 हथियार लाइसेंसधारी हैं, जिनमें 9,485 पुरुष और 375 महिलाएं शामिल हैं। हाल के वर्षों में भोपाल में नये लाइसेंस की संख्या में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला 2023 में 278, 2022 में 233, 2021 में 194, 2020 में 166 और 2019 में 157।

भारत में हथियारों का नियमन आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत होता है, जिसके अंतर्गत नागरिक केवल नॉन प्रोहिबिटेड बोर (एनपीबी) हथियार ही ले सकते हैं। प्रक्रिया काफी सख्त है,आवेदन कलेक्टरेट से शुरू होकर पुलिस अधीक्षक और थाने की जांच के बाद अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और फिर कलेक्टर तक पहुंचता है। कलेक्टर रायफल और 12 बोर बंदूक के लाइसेंस स्वीकृत कर सकते हैं।

लेकिन रिवॉल्वर और पिस्तौल के लिए प्रक्रिया और अधिक कठिन है। इसके लिए कलेक्टर और संभागायुक्त की सिफारिश अनिवार्य है और अंततः गृह मंत्री की मंजूरी के बाद ही लाइसेंस जारी होता है। डॉ. यादव के आदेश से यह प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए रोक दी गई है, जो राज्य में गन कल्चर पर सरकार की सख्त मंशा को दर्शाता है।

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