महिला सरपंच के पति और बेटे चला रहे पंचायत की सरकार

महू:महू विकासखंड की कई पंचायतों में महिला सरपंचों की जगह उनके पति और बेटे ही पंचायत की बागडोर संभाल रहे हैं. हालात ये हैं कि जहां महिला सरपंच चुनी गई, वहां असली फैसले उनके पति या बेटे ले रहे हैं.शासन की स्पष्ट मनाही के बावजूद पंचायत सचिव और जिम्मेदार अधिकारी इन सरपंच पतियों और बेटों को मान्यता देते हुए बैठकों में सरपंच की तरह पेश करते हैं. ग्राम सभा की बैठकों में भी कई बार महिला सरपंच की जगह पति या बेटा अध्यक्षता करता दिखाई देता है.

नौकरी छोड़ पंचायत की ‘सेवा’ में जुटे
कई पंचायतों में सरपंच बनने के बाद पतियों और बेटों ने अपने रोजगार कारोबार तक छोड़ दिए और पूरा समय पंचायत पर कब्जा जमाने में लगा दिया. ग्राम निधि से लेकर विकास कार्यों के बिल तक इनके हाथों से ही पास हो रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी खर्चे दिखाकर ये लोग अपनी जेब भरने का काम कर रहे हैं. 14 अगस्त 2022 को प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किया था कि ग्राम सभा की बैठकों में महिला सरपंच और पंच ही सक्रिय भागीदारी करेंगी.

सरपंच पति को बैठकों में शामिल तक नहीं होना है, अन्यथा संबंधित महिला सरपंच को पद से हटाया जा सकता है. बावजूद इसके हकीकत में ग्राम सभाओं में महिला सरपंचों की जगह उनके पति या बेटे ही मुख्य भूमिका निभा रहे हैं पत्नी के हस्ताक्षर तक खुद कर रहे। कुछ पंचायतों में हालात इतने खराब हैं कि महिला सरपंच की अनुपस्थिति में पति या बेटा खुद ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देता है. कई मामलों में तो यह सब पंचायत सचिव की मौजूदगी में होता है, जो रोकने के बजाय मौन समर्थन देते हैं.
जनता भी चुप..
सबसे गंभीर पहलू यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के जागरूक नागरिक भी इन अनियमितताओं पर चुप्पी साधे हुए हैं। नतीजा यह है कि पंचायती राज का असली स्वरूप खोखला हो रहा है और महिला सशक्तिकरण की भावना मजाक बनकर रह गई है

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