नयी दिल्ली, 11 सितम्बर (वार्ता) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि 21वीं सदी भारत जैसे विकासशील देशों के समक्ष दोहरी चुनौती है जिसमें युवाओं की विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ ही जलवायु परिवर्तन से जैव विविधता के नुकसान और पारिस्थितिकी क्षरण के प्रभावों से धरती को बचाना है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन सब स्थितियों को देखते हुए उनकी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महत्वाकांक्षा, नवाचार और परिवर्तन को महत्व देते हुए नया मार्ग चुनकर देश को प्रगति की राह पर ले जाने का संकल्प लिया है।
श्री यादव ने गुरुवार को यहां उद्योग एवं वाणिज्य मंडल फिक्की के ‘लीड्स’ सम्मेलन के चौथे संस्करण में सतत और सहयोगात्मक विकास में हरित वित्त की अहम भूमिका पर जोर दिया और कहा कि दीर्घकालीन और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं में हरित वित्त की मुख्य भूमिका है। उनका कहना था कि भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण का मार्ग प्रगति और लाभ को स्थिरता के साथ जोड़ने पर निर्भर करता है, जिसमें लोगों के विकास और पारिस्थितिकी प्रणाली को विकास के केंद्र में रखा जाता है।
उन्होंने बल देकर कहा कि सरकारों, उद्योग, नियामकों, वैश्विक वित्तीय संस्थानों और नागरिकों के बीच सहयोगात्मक विकास, समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करते हुए जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने की कुंजी है। उनका कहना था कि हरित वित्त पोषण को ऐसी आर्थिक प्रणालियाँ बनाना चाहिए जिनमें विकास पारिस्थितिकी, कल्याण और समुदायों के स्वास्थ्य के साथ जुड़ा हो।
केंद्रीय मंत्री ने हरित निवेश में विश्वास पैदा करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला और कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी और पर्यावरण-पुनर्स्थापना प्रतिबद्धताओं को सक्षम करने के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हरित क्रेडिट कार्यक्रम की कार्यप्रणाली में संशोधन किया गया है।
भारत जैसे देशों के लिए दोहरी चुनौती की है 21वीं सदी : यादव
