सडक़ पेंचवर्क के नाम सिर्फ गड्ढों की लीपापोती, सडक़ों की असली मरम्मत अब भी अधूरी

(इरशाद खान) मक्सी। मक्सी रेलवे स्टेशन मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर प्रकाशित विशेष खबर का असर जरूर हुआ, लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई महज़ औपचारिकता तक सीमित रही. सडक़ के गड्ढों को भरने की खानापूर्ति तो की गई, लेकिन साइड शोल्डर व जलनिकासी की समस्या जस की तस बनी हुई है.

स्थानीय रहवासी संजय अग्रवाल का कहना है कि विभाग द्वारा केवल गड्ढे भरकर लीपापोती कर दी गई है, लेकिन साइड शोल्डर को सही तरीके से नहीं भरा गया. जिससे स्कूली बच्चों के गिरने की समस्या अभी भी बनी हुई है. नवभारत समाचार पत्र में मक्सी से रेलवे स्टेशन से झोकर रोड फाटक तक का मात्र 500 मीटर रोड के लिए एक खबर प्रकाशित की थी, इसके पश्चात पीडब्ल्यूडी विभाग ने कुछ गड्ढे भरकर इतिश्री कर ली, जबकि उस रोड पर सामने से एक फोर व्हीलर वाहन आ जाए तो पैदल चलने वाले यात्री को नीचे उतरने के लिए भी जगह नहीं बचती. क्योंकि साइड सोल्डरों में एक एक फीट के गड्ढे बन गए हैं. साथ ही उस रोड के आसपास झाडिय़ां भी वाहनों से टकरा रही है जो पूरे 500 मीटर रोड को खराब कर रही है. यह रोड भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता जा रहा है. मक्सी का रेलवे स्टेशन रोड कब भ्रष्टाचार से मुक्त होगा और प्रशासन कब सूद लेगा. बता दें कि मक्सी रेलवे स्टेशन तक जाने वाला मुख्य मार्ग वर्षों से बदहाल है और बरसात में यह रास्ता कीचड़ व फिसलन का दलदल बन जाता है. रहवासी, बुजुर्ग और महिलाएं इस रास्ते पर चलने से घबराते हैं. हालांकि नवभारत की खबर के बाद विभागीय अमला हरकत में तो आया पर यह काम दिखावे से ज्यादा कुछ नहीं लगा. न सडक़ों की समुचित मरम्मत हुई और न ही जल निकासी या लाइटिंग की व्यवस्था की गई. रहवासियों का कहना है कि जब तक इस मार्ग की संपूर्ण मरम्मत, रोड शोल्डर, प्रकाश व्यवस्था और जलनिकासी नहीं होती तब तक स्टेशन तक का सफर जोखिम भरा ही रहेगा.

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