
बैतूल।जल संरक्षण और प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 72 वर्षीय संत पंडित रामसखा पांडे ने बुधवार दोपहर बैतूल के काशी तालाब में जल समाधि ली। चित्रकूट धाम से आए संत ने दोपहर 12 बजे जल साधना शुरू की, जो करीब एक घंटे तक चली। इस दौरान उन्होंने तालाब के जल में पद्मासन और श्वासन जैसे योगासन किए, उनका शरीर जल की सतह पर स्थिर बना रहा।
इस अनूठी जल योग साधना को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग तालाब के किनारे एकत्र हुए। सुरक्षा के लिहाज से एसडीईआरएफ की टीम प्रभारी सुनीता पंद्रे के नेतृत्व में मौके पर तैनात रही।
पंडित रामसखा पांडे ने कहा, जल और जीवन एक-दूसरे से जुड़े हैं। यदि जल प्रदूषित होगा, तो जीवन भी संकट में पड़ जाएगा। यह साधना केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि प्रकृति को बचाने की चेतावनी है। उन्होंने बताया कि वे पिछले 45 वर्षों से देशभर में जल साधना कर रहे हैं और वर्तमान में मैहर के बड़े अखाड़ा में रहकर समाजसेवा करते हैं। उनके चित्रकूट में तीन आश्रम हैं, जहां जल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलते हैं। इस जल योग साधना ने न सिर्फ दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि जल बचाने का गहरा संदेश भी दिया।
