लालू से मुलाकात के लिए इंडिया गठबंधन उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी की आलोचना

नयी दिल्ली 09 सितंबर (वार्ता) कानूनी क्षेत्र के कुछ दिग्गज हस्तियों ने उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में विपक्षी इंडिया गठबंधन के साझा उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड़डी के बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से हाल में निजी तौर पर मुलाकात करने को लेकर उनकी आलोचना की है। इन व्यक्तियों ने सोमवार को एक साझा बयान में इस तथ्य का उल्लेख किया है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख श्री यादव बिहार सरकार के 940 करोड़ रुपये के गबन करने के आरोप में दोषी करार हैं। बयान में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके श्री रेड्डी की श्री यादव से निजी भेंट को यह कहकर उचित नहीं ठहराया जा सकता कि यह चुनाव पर परामर्श के लिए थी क्योंकि श्री यादव न तो सांसद हैं और ना ही उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदाता।

श्री यादव ने पिछले सप्ताह हुयी मुलाकात की फोटो और जानकारी सोशल मीडिया एक्स पर जारी की है।

इसके लिए श्री यादव के साथ श्री रेड्डी की मुलाकात की आलोचना में कहा गया है कि वह उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके हैं और देश के उच्च संवैधानिक पद को संभालने की अकांक्षा रखते हैं। उनकी ओर से ऐसी संदिग्ध तरह की मुलाकात से उनके निर्णय और औचित्य पर गंभीर सवाल उठाती है।

उन्होंने कहा कि न्यायिक क्षेत्र में उत्कृष्ट पृष्ठभूमि होते हुए भी श्री रेड्डी का एक ऐसे व्यक्ति से मिलना जिसे भारत की अदालतों में उसके आपराधिक कृत्यों के लिए दोषी ठहराया जा चुका है, विशेष रुप से चिंता उत्पन्न करता है।

बयान में यह भी कहा गया है कि इस मामले में उन कतिपय हलकों के लोगों की चुप्पी भी हैरान करने वाली है जो इससे छोटे आरोपों पर सामान्य तौर पर हायतौबा मचाते रहते हैं। यह मामला न केवल उन लोगों की भेदभावपूर्ण व्यवहार को पुन: उजागर करता है जो अपने को संविधान और नैतिकता के पहरुआ होने का दावा करते हैं बल्कि इससे यह भी जाहिर होता है कि वे अपने निहित स्वार्थ और राजनैतिक सुविधा के लिए गंभीर उल्लंघनों को नजरअंदाज करने में गुरेज नहीं करते।

बयान में कहा गया है कि श्री रेड्डी का एक ऐसे दोषी करार व्यक्ति से मिलने का फैसला जिसने भ्रष्टाचार के लिए राष्ट्रीय हितों को छति पहुंचाया है पूर्व न्यायाधीश रेड्डी के इरादों व संबंधों के बारे में बहुत कुछ जाहिर करता है। बयान में कहा गया है कि देश के एक प्रभावशाली एवं प्रतिष्ठित संवैधानिक पद का चुनाव लड़ रहे ऐसे व्यक्ति द्वारा की गयी यह चूक उसके निर्णय में एक आधारभूत त्रुटि है और जनता उस पर जरुर गौर करेगी।

बयान पर उच्च न्यायालयों में काम कर चुके पूर्व न्यायाधीश सर्वश्री एस एम खांडेपरकर, अंबादास जोशी, आर के मारतिया, देवेंद्र कुमार आहूजा, एस एन धींगरा, करमचंद पूरी, पी एन रविंद्रन और पूर्व न्यायाधीश आर एस राठौर के हस्ताक्षर हैं।

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