महापौर के बेटे संघमित्र को राजनीति का मोहरा बनाना निंदनीय

इंदौर: एक स्कूली बालक का वाद विवाद प्रतियोगिता में विपक्ष की भूमिका निभाना, राजनीतिक अखाड़े का मामला बन गया!महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पुत्र संघमित्र ने एक वाद विवाद प्रतियोगिता में विपक्ष की भूमिका में सरकार और रेल मंत्रालय पर सवाल उठाए. उसके लिए उसे पुरस्कृत किया गया, उसने प्रतियोगिता जीती. इसलिए नहीं कि वो राजनीतिक चर्चा और महापौर पुत्र होने का खामियाजा भुगते.

संघमित्र की भाषण शैली की पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सराहना कर दी. कांग्रेस ने उसके सवाल को टारगेट कर बहस छेड़ दी. इस बारे में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि महापौर का पुत्र होने से बच्चे को टारगेट नहीं करें. उसकी प्रतिभा की तारीफ करें. ऐसे ही प्रतियोगिताओं के जरिए बच्चों में कला विकसित होती है, फिर चाहे वाकपटुता हो या वाद विवाद. यह सिर्फ एक प्रतियोगिता थी, जिसमें उसे विपक्ष पर बोलना था, उसने अपना काम किया.

फिल्म स्टार भी तो नायक, खलनायक की भूमिका निभाते हैं. रावण की भूमिका निभाने वाले आशुतोष राणा रावण हो गए क्या? महापौर पुत्र को राजनीति का मोहरा बनाना न केवल निंदनीय है अपितु अमानवीय भी है.
खेल में राजनीति करती है कांग्रेसः महापौर
इस बारे में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि कांग्रेस खेल में राजनीति करती है और राजनीति में खेल करती है. मेरे पुत्र को राजनीति का मोहरा बनाया जा रहा है. मैं उसकी निंदा करता हूं. उसको वाद विवाद प्रतियोगिता में जो विषय दिया, उसने वो निभाया.

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