चमड़े का सामान होगा सस्ता, घट गई जीएसटी दरें

नयी दिल्ली , 04 सितंबर (वार्ता) वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में हुए बदलाव का बड़ा फायदा चमड़े की वस्तुओं के उपभोक्ताओं को मिलने जा रहा है।

जीएसटी परिषद की कल यहां हुई बैठक में चमड़े के सामान पर लगने वाले कर की दर 12 प्रतिशत से कम करके पांच प्रतिशत करने का ऐलान किया गया है। इनमें टैनिंग या क्रस्टिंग के बाद तैयार किया गया चमड़ा, पेटेंट चमड़ा वाला और पेटेंट लैमिनेटेड चमड़ा शामिल है। इसके अलावा चमड़े या चमड़े के रेशे के आधार वाला संयोजन चमड़ा, मिश्रित चमड़े के छिलके और अन्य अपशिष्ट पर भी कर की दर को 12 फीसदी से पांच फीसदी कर दिया गया है। इसी श्रेणी में पक्षियों की खालें और उनके पंख से बनी वस्तुएं भी शामिल की गई हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था में चमड़ा उत्पाद और फुटवियर उद्योग का खासा महत्व है। यह क्षेत्र उच्च निर्यात आय में अपनी निरंतरता के लिए जाना जाता है और यह देश के लिए शीर्ष दस विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले क्षेत्रों में से एक है। इसकी वजह यह है कि यह उद्योग कच्चे माल की प्रचुरता से संपन्न है क्योंकि भारत में विश्व की 20% मवेशी और भैंस और विश्व की 11% बकरी और भेड़ आबादी पाई जाती है।

चर्म निर्यात परिषद के अनुसार 2020-21 के दौरान भारत से फुटवियर, चमड़ा और चमड़ा उत्पादों का निर्यात 3.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था।

चमड़ा उद्योग एक रोजगार प्रधान क्षेत्र है, जो लगभग 50 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है, जिनमें से अधिकांश समाज के कमजोर वर्गों से हैं। इस क्षेत्र की खास बात यह है कि चमड़ा उत्पाद क्षेत्र में महिलाओं की लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

भारत चमड़े के वस्त्रों का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक और चमड़े के सामान का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है।

भारत में जूता, चमड़ा और चमड़ा उत्पादों के प्रमुख उत्पादन केंद्र तमिलनाडु में चेन्नई, अम्बुर, रानीपेट, पश्चिम बंगाल में कोलकाता; उत्तर प्रदेश में कानपुर, आगरा, नोएडा, सहारनपुर हैं। इनके अलावा हरियाणा के अंबाला, गुड़गांव, पंचकुला, करनाल के साथ साथ मुंबई, जालंधर, बेंगलुरु, और हैदराबाद भी प्रमुख केन्द्र है।

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