जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया है कि शासकीय होम्योपेथिक कॉलेज में कार्यरत पैरामेडिकल स्टाफ को उच्च वेतनमान (वित्तीय उन्नयन) पर निर्णय ले। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने इसके लिए सरकार को 60 दिन की मोहलत दी है। न्यायालय ने कहा है कि यदि आदेश का पालन नहीं होगा तो आयुष विभाग और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल निवासी अखिलेश साहू व अन्य की ओर से अधिवक्ता अनमोल श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्तागण पिछले 15-20 वर्षों से पैरामेडिकल पद जैसे लैब टेक्निशियनए रेडियोग्राफर, फार्मासिस्ट, डायटीशियन के पद पर कार्यरत हैं। दलील दी गई कि इतने वर्षों की सेवा के बाद भी न तो उन्हें प्रमोशन दिया गया और न ही कोई समयमान वेतनमान बढ़ाया गया।
सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता पैरा-मेडिकल पदों पर कार्यरत हैं जो स्थिर और एकल पद हैं, जिनके लिए कोई पदोन्नति चैनल नहीं है। यह भी बताया गया कि कॉलेज के प्राचार्य ने 3 अक्टूबर 2024 को आयुष विभाग के आयुक्त को पत्र लिखकर उक्त पदों पर पदस्थ कर्मियों के लिए वित्तीय उन्नयन का प्रावधान करने की मांग की है। यह भी बताया गया कि इस तहर के पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को एसीएस या उच्च वेतनमान के संबंध में वित्त विभाग में मामला विचाराधीन है।
