सवा हाथ के मंदिर में विराजे चार हाथ के श्री गणेश, शहर की सुरक्षा करते हैं गजानन

शाजापुर।गणपति बप्पा की विशालकाय मूर्तियां और मंदिर तो सभी ने देखे होंगे, लेकिन शाजापुर में महज सवा हाथ का मंदिर है, जिसमें चार हाथ की ऊंचाई के श्री गणेश विराजमान हैं. शहर में यह मंदिर पीढिय़ों से लोग देखते आ रहे हैं. यह भक्तों की आस्था का केंद्र है. गणेशोत्सव को लेकर भक्तों में अलग ही उत्साह नजर आ रहा है.

मीरकलां बाजार स्थित विघ्नहर्ता का यह मंदिर गेट के नीचे सडक़ किनारे स्थित है. यह मंदिर क्षेत्र का सबसे छोटा मंदिर कहा जा सकता है. इस मंदिर को लेकर शहरवासियों ने बताया कि मीरकला गेट के नीचे स्थित इस मंदिर की ऊंचाई सवा हाथ की है, जिसमें चार हाथ के गणेश जी विराजमान हैं. बताया जाता है शाजापुर में 16वीं सदी का शाहजहां कालीन किला बना था. किले के निर्माण के साथ ही किला रोड, मीरकला, सोमवारिया व कसेरा बाजार में चार प्रवेश द्वार भी बनाए गए थे. इन्हीं में से मीरकला क्षेत्र का प्रवेश द्वार है. इसी के साथ नीचे भगवान गणेश का छोटा सा मंदिर है. सडक़ से सटे इस मंदिर के ऊपरी हिस्से पर एक दुकान बनी हुई है. गेट के साथ ही इसकी स्थापना हुई थी.

नगर में जगह-जगह विराजे श्री गणेश

नगर में विभिन्न समितियों द्वारा आकर्षक गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की गई है. जहां गणेश चतुर्थी के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी श्रीगणेश हो गया था.

 

शहर की सुरक्षा करते है चार हाथ के बप्पा..

 

यूं तो इस मंदिर में सेवा और पूजा का जिम्मा वहीं रहने वाले गुप्ता परिवार के सदस्य करते हैं, लेकिन आसपास के लोगों के लिए भी यह मंदिर आस्था का केंद्र है और वहां रहने वाले शहरवासी व व्यापारी इनके दर्शन के साथ ही अपने दिन की शुरुआत करते हैं. कहते हैं कि बप्पा की मौजूदगी से ही शहर में कोई मुसीबत नहीं आती और बप्पा हर समय वहां मौजूद रहकर पूरे शहर की सुरक्षा करते हैं. कई बार मुसीबत भी आई, तो वह टल गई. यही वजह है कि यहां प्रतिदिन लोग बप्पा का आशीर्वाद लेकर ही अपने दिन और काम की शुरूआत करते हैं.

 

यहां बरसों से विराजित है गजानंद…

 

उक्त मंदिर कब से है, किसने इसे स्थापित किया, इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं, लेकिन लोग कहते हैं कि यह मंदिर लंबे समय से यहां विराजित है और लोगों की आस्था का केंद्र है. हर वर्ग के व्यापारी बप्पा को भोग लगाते हैं. इनकी पूजा करते हैं. उसके बाद अपना काम शुरू करते हैं. लोगों का मानना है कि उनके दर्शन करने और आशीर्वाद लेने के बाद किया गया कोई भी काम उन्हें फायदा पहुंचाता है, जिसके चलते वे बरसों से यहां उनकी आराधना कर रहे हैं.

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