
सिंगरौली। जिला मुख्यालय बैढ़न के मार्कफेड गोदाम कचनी में यूरिया खाद लेने रतजगा करने के लिए किसान मजबूर हंै। वहीं ग्रामीण अंचल के समितियों में खाद के लिए शपथ पत्र भी किसानों के मुसीबत बनता जा रहा है।
दरअसल जिले में इस वर्ष उर्वरक के लिए मारा-मारी मची हुई है। उर्वरक के लिए शायद इतनी मारा मारी इसके पूर्व कभी नही थी। आलम यह है कि मार्कफेड गोदाम कचनी में खाद के लिए आधी रात से ही लोग पहुंच रतजगा करते हैं, तभी कहीं जाकर दोपहर तक में खाद मिल पाती है। इस दौरान लाईन में लगने के लिए आपस में ही धक्का-मुक्की करने लगते हैं। यह समस्या पिछले कई दिनों से है। जहां उर्वरक के लिए इतनी मारा मारी मची है कि अब प्रदेश सरकार की जमकर किरकिरी होने लगी है। अन्नदाता खुलेआम प्रदेश सरकार पर नाकामी एवं साहूकारों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं। इधर देवसर विधायक राजेन्द्र मेश्राम भी जिला प्रशासन के कार्यप्रणाली से नाखुश हैं। विधायक ने इस संबंध में कलेक्टर से बात कर समस्या का तत्काल हल कराते हुये किसानों को खाद मुहैया कराने के लिए कहा है। वहीं ग्रामीण अंचल के समितियों में किसानों से शपथ पत्र लिये जाने के मामले में अधिकांश भाजपाई नेता भी नाराज हो गये हैं और शपथ पत्र को सिथिल किये जाने की मांग कर रहे हैं।
शपथ पत्र मांगने से किसान नाराज, सरकार के प्रति गुस्सा
सेवा सहकारी समितियों में खाद की किल्लत पूर्व में बनी थी। आरोप है कि कई समितियों के कर्ता-धर्ताओं ने गुपचुप तरीके से कालाबाजारी कर दिया। लेकिन इन दिनों खाद समितियों में कलेक्टर के प्रयास से पहुंच गई। उधर ग्रामीण अंचल के समितियों में किसानों उर्वरक के लिए शपथ पत्र की मांग की जा रही है। किसानों का कहना है कि 50 रूपये का स्टाम्प लेने में पसीने छूट जा रहे हैं। उसमें भी नोटरी अलग से। किसी दिन सर्वर नही रहता है और बिजली भी गुल हो जाती है। मैनुअल स्टाम्प बड़े ही मुश्किल से मिलता है। बगदरा अंचल के किसानों को शपथ पत्र के लिए 60 किलोमीटर दूर चितरंगी मुख्यालय आना पड़ता है, तब कहीं जाकर शपथ पत्र बनता है। जिला प्रशासन के इस व्यवस्था से भाजपा के अधिकांश खास कर किसान नेता नाराज हैं और इसकी शिकायत विधायक एवं सांसद से कर रहे हैं।
