नयी दिल्ली, 02 अगस्त (वार्ता) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि भारत का विकास मॉडल आर्थिक प्रगति और पारिस्थितिकी संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के सभी सभी मानदंडों को पूरा करता है।
श्री यादव मंगलवार को भारतीय उद्योग परिसंघ-सीआईआई-आईटीसी सतत विकास उत्कृष्टता केंद्र द्वारा यहां आयोजित 20वें वैश्विक स्थिरता शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में 10 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल थे। इस दौरान सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी और सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष संजीव पुरी भी मौजूद थे।
केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यापार तनाव, नीतिगत अनिश्चितता, भू- राजनीतिक संघर्ष और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा वैश्विक वित्तीय निवेश में पैदा की जा रही बाधाएँ एक कमजोर वातावरण का निर्माण कर रही हैं। इन परिस्थितियों से निपटने के लिए उन्होंने सभी देशों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के समाधान अपनाकर स्थिरता को विकास का आधार बनाएं जिसमें अर्थव्यवस्था के मॉडल में प्रकृति के प्रति सकारात्मक कार्य, हरित विकास और ज़िम्मेदारी का निर्वहन करते हुए व्यवहार परिवर्तन को महत्व मिले।
श्री यादव ने कहा कि उनके मंत्रालय ने स्थायी भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से हाल में महत्वपूर्ण अधिसूचनाएँ जारी की हैं। उनका कहना था कि मंत्रालय ने 29 अगस्त को पर्यावरण लेखा परीक्षा नियम 2025 अधिसूचित किया है जो पूरे देश में पर्यावरण लेखा परीक्षा के लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार करेगा। इन नियमों के तहत लेखा परीक्षकों की एक द्वि-स्तरीय प्रणाली स्थापित की जाएगी और इस प्रक्रिया की पारदर्शी निगरानी के लिए एक समर्पित एजेंसी का गठन किया जाएगा। श्री यादव ने स्पष्ट किया कि, “ये नियम सरकार के मौजूदा निगरानी और निरीक्षण ढांचे के पूरक हैं, उसे प्रतिस्थापित करने के लिए नहीं हैं।”
उन्होंने 29 अगस्त को ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के लिए संशोधित कार्यप्रणाली की अधिसूचना के बारे में बताते हुए कहा कि स्वैच्छिक पर्यावरणीय कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए मूल रूप से अक्टूबर 2023 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम को अब ऐसे प्रावधानों के साथ और मज़बूत किया गया है जो निजी संस्थाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी की अनुमति देते हैं, न्यूनतम पुनर्स्थापन प्रतिबद्धताएँ स्थापित करते हैं, जलवायु परिवर्तन नीति के तहत किये जा रहे पहलकदमियों के लिए निजी पूँजी जुटाते हैं और अर्जित ग्रीन क्रेडिट का उपयोग करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यह संशोधित कार्यप्रणाली पूरी तरह से सुनिश्चित करेगी कि ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम सार्थक पर्यावरणीय पुनर्स्थापन के लिए प्रेरक बने।
श्री यादव ने कहा कि भारत सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और साथ ही जलवायु संबंधी कार्यवाही पर वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व भी कर रहा है। भारत एकमात्र देश है जिसने लक्षित योजना कार्यान्वयन, बुनियादी ढाँचे में निवेश, स्थानीय प्रतिबद्धता और बहुपक्षीय प्रतिबद्धताओं पर महत्वपूर्ण उपलब्धियों के माध्यम से नीतिगत परिदृश्य में सतत विकास को सफलतापूर्वक अपनाया है।
उन्होंने कहा कि हमारी स्थायी आर्थिक प्रगति लचीलेपन, पुनर्योजन और उत्तरदायित्व पर आधारित है – ऐसे मूल्य जिन्हें दुनिया को अब सतत विकास की नींव के रूप में अपनाना चाहिए।

