चेन्नई, (वार्ता) बीमा उद्योग के जानकार लोगों और कानूनी विशेषज्ञों ने भारतीय बीमा कंपनियां (विदेशी निवेश) नियम, 2015 में संशोधन और कुछ प्रतिबंधों को उदार बनाने के केन्द्र सरकार के निर्णय को बीमा कानूनों में लंबे समय से प्रतीक्षित संशोधन की प्रस्तावना बताया है।
वित्त मंत्रालय ने इस नियम में प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा 29 अगस्त को जारी किया है। इसमें कहा गया है कि “मसौदा नियमों की प्रतियां सार्वजनिक किये जाने की तारीख से पंद्रह दिन बाद राजपत्रत में अधिसूचित किया जाएगा।”
पेशे से कंपनी सचिव (बीमा एवं कॉर्पोरेट कानून) सी.एल. भारतद्वाज ने यूनीवार्ता से कहा, “बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने के लिए बीमा अधिनियम में संशोधन की प्रस्तावना के रूप में, केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश वाली भारतीय बीमा कंपनियों पर कुछ प्रतिबंधों में ढील देने के प्रस्ताव वाले नियम का मसौदा जारी किया है।”
श्री भारतद्वाज ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 2025 के बजट भाषण का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीमा क्षेत्र के लिए एफडीआई की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत की जाएगी और विदेशी निवेश से जुड़ी मौजूदा सुरक्षा और शर्तों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें सरल बनाया जाएगा।
मुंबई स्थित केएस लीगल एंड एसोसिएट्स की मैनेजिंग पार्टनर सोनम चंदवानी ने कहा, “मसौदा दर्शाता है कि सरकार बीमा अधिनियम में संशोधन का इंतज़ार करने के बजाय, प्रत्यायोजित क़ानूनों के ज़रिए बीमा क्षेत्र में निवेश को उदार बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।”
श्री चंदवानी ने कहा, ” नये नियमों के मसौदे में कहा गया है कि विदेशी निवेश की सीमा बीमा अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा के अनुसार होगी।”
इसका अर्थ यह है कि जब भी बीमा अधिनियम द्वारा निर्धारित सीमाओं में संशोधन किया जाता है, तो अधीनस्थ नियमों में संशोधन करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
