
उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम भक्त अब भी प्रवेश नहीं कर सकेंगे। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को अपने आदेश में साफ कहा कि गर्भगृह में किसे अनुमति दी जाए और किसे नहीं, यह निर्णय लेने का अधिकार जिला कलेक्टर के पास ही रहेगा। कोर्ट ने वर्तमान व्यवस्था को सही ठहराते हुए कहा कि फिलहाल यथास्थिति बनी रहेगी।
गौरतलब है कि इंदौर निवासी दर्पण अवस्थी ने वकील चर्चित शास्त्री के जरिए जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश से वंचित किया जाता है, जबकि प्रभावशाली और वीआईपी व्यक्तियों को विशेष अनुमति मिल जाती है। इसे भेदभावपूर्ण बताया गया था।
रिव्यू पिटीशन लगाएंगे
हाईकोर्ट ने दलीलों पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा और सोमवार फैसला सुना दिया है। वकील चर्चित शास्त्री ने संकेत दिए हैं कि वे इस आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे। उनका कहना है कि “यह लाखों महाकाल भक्तों की आस्था का सवाल है, जिसे हम दोबारा कोर्ट के सामने रखेंगे।”
कलेक्टर बोले , आदेश का अध्ययन करेंगे
गौरतलब है कि इस याचिका में महाकाल मंदिर प्रबंध समिति, उज्जैन कलेक्टर और एसपी प्रदीप शर्मा को भी पक्षकार बनाया गया है। नवभारत से चर्चा में उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के बारे में जानकारी मिली है ,उक्त आदेश का अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहा जाएगा, वैसे जो दर्शन की प्रक्रिया चल रही है, वैसे ही चलती रहेगी बाबा महाकाल के निर्बाध दर्शन सभी को हो यही जिला प्रशासन और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति का प्रयास है।
