महाकाल में भीड़ नियंत्रण की नई व्यवस्था होगी: पहले आओ, पहले पाओ का नवाचार

उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर के मंदिर में लाखों दर्शनार्थी प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, ऐसे में सैकड़ो वीआईपी प्रोटोकॉल के दर्शन भी कराए जाते हैं, सामान्य दर्शन किस प्रकार से सुलभ हो सके इसको लेकर उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक द्वारा नई व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है.

इसके लिए प्रथम आओ प्रथम पाओ जैसे नवाचार किया जा सकते हैं.महाकाल के सामान्य दर्शन और भस्म आरती के समय नंदी हाल से लेकर गणेश मंडपम तक श्रद्धालुओं का इतना बड़ा जमावड़ा हो जाता है कि धक्का-मुक्की और अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है. भीड़ के दबाव को देखते हुए अब प्रशासन ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है.

नई व्यवस्था का खाका तैयार
महाकाल मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर एक नई योजना बना रहे हैं जिसके अंतर्गत ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा. यानी जो भक्त सबसे पहले पहुंचेंगे, उन्हें पहले बैठने और दर्शन का अवसर दिया जाएगा. इससे भीड़ पर नियंत्रण होगा और श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से भगवान महाकाल का दर्शन कराया जा सकेगा.

नंदी हाल और गणेश मंडपम में होगी नई सीटिंग प्लानिंग
नंदी हाल और गणेश मंडपम सबसे ज्यादा भीड़ वाले हिस्से हैं. यहां पर यह तय किया जाएगा कि किस समय पर कितने श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा और उन्हें किस स्थान पर बैठाया जाएगा. सीटिंग अरेंजमेंट और बैरिकेडिंग की नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा.

प्रशासनिक स्तर पर मंथन जारी
इस योजना को लागू करने के लिए उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक लगातार बैठकें कर रहे हैं. मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या, उनकी सुरक्षा, और उन्हें व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराने पर गहन चर्चा हो रही है.

जल्द होगा निर्णय
हालांकि अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि कुछ ही समय में नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी. इसके बाद श्रद्धालुओं को तय समय पर मंदिर पहुंचकर पंजीयन कराना होगा और उसी के आधार पर दर्शन का अवसर मिलेगा.

श्रद्धालुओं की सुविधा पर फोकस
मंदिर प्रशासन का कहना है कि नई योजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आरामदायक, सुरक्षित और भीड़ रहित दर्शन कराना है. इससे न केवल धक्का-मुक्की और अव्यवस्था रुकेगी, बल्कि भक्तों का आस्था अनुभव भी बेहतर होगा।इस योजना के लागू होने के बाद महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था एक नए स्वरूप में दिखाई देगी और भीड़ पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा.

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