जैसलमेर, 30 अगस्त (वार्ता) ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना अपनी सैन्य क्षमताओं एवं अपनी प्रहार क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए तकनीकि क्षमताओं को परखने के लिये युद्धाभ्यास और सैन्य क्रिया कलापों को अंजाम दे रही है।
इसी कड़ी में सेना ने राजस्थान में जैसलमेर में भारतीय सेना की युद्धक एक्स डिवीजन ने जैसलमेर के सैन्य क्षेत्र में ‘युद्धाभ्यास ड्रोन अस्त्रा-2’ का आयोजन किया। यह मानवरहित हवाई प्रणालियों के वास्तविक समय में सामरिक संचालन में एकीकरण का प्रदर्शन करने वाला एक अत्याधुनिक अभ्यास था।
सैन्य सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस अभ्यास में सैन्य अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी की, जिसे युद्धक्षेत्र के वातावरण में ड्रोन की परिचालन उपयोगिता को मान्य करने के लिए बनाया गया था। वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में आयोजित इस अभ्यास ने दिखाया कि कैसे ड्रोन खुफिया, निगरानी और टोही क्षमता को बढ़ा सकते हैं। सभी स्तरों पर सामरिक जुड़ाव में सटीक लक्ष्य साध सकते हैं। भारतीय सेना ने पैदल सेना और अन्य सहायक शाखाओं को शामिल करते हुए समन्वित अभियानों में ड्रोन की सहज तैनाती का प्रदर्शन किया।
सूत्राें ने बताया कि अभ्यास ने सामरिक कमांडरों के लिए बेहतर स्थितिजन्य जागरूकता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया, जिसमें निगरानी प्रणालियां और वास्तविक समय डेटा का साझाकरण शामिल था। अभ्यास में ड्रोन युद्ध के लिए महत्वपूर्ण सहायक उपकरणों का परीक्षण शामिल था। इसमें हवाई क्षेत्र के टकराव से बचने के उपाय, सुरक्षित संचार नेटवर्क और सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं के बीच समन्वय शामिल थे। ये क्षमतायें जटिल युद्ध वातावरण में ड्रोन-आधारित अभियानों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक हैं।
सैन्य सूत्रों के मुताबिक यह अभ्यास भविष्य की सुरक्षा खतरों का तेजी और सटीकता से मुकाबला करने के लिए एक तकनीकी रूप से सशक्त बल बनाने के अपने व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। जैसे-जैसे भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे अभ्यास नवाचार और अनुकूलनशीलता के प्रति सेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं। अभ्यास ड्रोन अस्त्रा-2 भारतीय सेना के विकसित होते युद्ध सिद्धांत का प्रमाण है, जो तकनीक-चालित श्रेष्ठता और युद्धक्षेत्र में प्रभुत्व को प्राथमिकता देता है।
पिछले कुछ वर्षों से भारतीय सशस्त्र बल ड्रोन प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो युद्ध के लिए एक नया युद्धक्षेत्र बन गया है और इसकी महत्ता को शीर्ष सेना अधिकारियों ने बार-बार दोहराया है। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, स्वदेशी ड्रोन प्रौद्योगिकियों का महत्व आधुनिक युद्ध में परिवर्तनों को दर्शाता है, जो न केवल गोला-बारूद, तोपखाने, लड़ाई पर केंद्रित हैं, बल्कि ड्रोन पर भी निर्भर करता है।
