मांडविया ने खेल सामग्री विनिर्माण के प्रथम सम्मेलन में ‘गर्व से स्वदेशी’ का समर्थन किया

नयी दिल्ली, 30 अगस्त (वार्ता) खेल सामग्री निर्माण को लेकर नए गजट जारी होने के बाद केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित खेल सामग्री निर्माण सम्मेलन कार्यक्रम का पहला आयोजन दिल्ली में किया गया l

मंत्रालय द्वारा आयोजित खेल सामग्री निर्माण सम्मेलन कार्यक्रम में केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने हिस्सा लिया। साथ में मौके पर केन्द्रीय खेल मंत्रालय के सचिव हरि रंजन राव एवं केन्द्रीय खेल विभाग के संयुक्त सचिव आर. विनील कृष्णा भी मौजूद रहे l

कार्यक्रम में पहुंचे डॉ.मनसुख मंडाविया ने खेल सामग्री निर्माण करने वाली सभी कंपनी निर्माताओं का पहुंचने के लिये धन्यवाद किया l केंद्रीय मंत्री ने खेल सामग्री विनिर्माण नीति तैयार करने के लिए टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की l मांडविया ने कहा, ”वैश्विक स्तर पर खेल विनिर्माण क्षेत्र में हिस्सेदारी वर्तमान 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2036 तक 25 प्रतिशत की जाएगी l”

‘यूनीवार्ता’ से बात करते हुये केन्द्रीय खेल विभाग के संयुक्त सचिव आर. विनील कृष्णा ने बताया कि केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित खेल सामग्री निर्माण सम्मेलन को लेकर पूरी तरह मेक इन इंडिया पर पूरा जोर दिया जायेगा एवं कंपनी निर्माताओं की हर समस्या को गंभीरता से लिया जायेगा l

देश के अलग अलग राज्यों से 50 से अधिक पहुंचे कंपनी निर्माताओं ने अपने अपने सवाल मंत्री एवं मंत्रालय के अधिकारियों के सामने रखे, जिसमें स्पोर्टस के लिये बेहतर प्रयोगशाला की सबसे बुनियादी एवं बड़ी समस्या सामने आई l इसके अलावा कंपनी निर्माताओं ने बताया कि उत्पादन के लिये प्रयोग होने वाले कच्चा माल उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती है, गौरतलब है कि कंपनी निर्माताओं के लिये भारत में एक भी स्पोर्टस प्रोडक्ट बनाने को लेकर खुद की एक भी प्रयोगशाला नहीं है , यही कारण है कि अपने स्पोर्टस प्रोडक्ट को प्रयोगशाला हेतु कंपनी निर्माताओं को विदेशों का रुख करना पड़ता है l जो यूजर तक पहुंचते -पहुंचते महँगी और गुणवत्ता भी बहुत ज्यादा ठीक नहीं होती l इसलिये सरकार से अनुरोध है कि भारत में खुद की प्रयोगशाला बनाने हेतु कदम बढ़ाया जाये l

आपको बता दें कि पहले खेल सामग्री निर्माण का काम वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन आता था लेकिन नये गजट होने के बाद अब 25 अगस्त 2025 से ये काम केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा देखा जायेगा l इसी को लेकर यह पहला कार्यक्रम किया गया l खेल सामग्री निर्माण के क्षेत्र में काम करने वाले कंपनी निर्माताओं ने इस कार्यक्रम के लिये युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की तारीफ की l

इसका समग्र उद्देश्य भारत को एक वैश्विक खेल और आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ाना है।

भारतीय खेल सामग्री का बाजार 2024 में 4.88 बिलियन अमेरिकी डॉलर (42,877 करोड़ रुपये) था और इसके 2027 तक 6.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर (57,800 करोड़ रुपये) और 2034 तक 87,300 करोड़ रुपये तक बढ़ने का अनुमान है।

यह क्षेत्र मुख्य रूप से मेरठ, जालंधर, लुधियाना और दिल्ली-एनसीआर में एमएसएमई समूहों में पांच लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। भारत एशिया में तीसरा सबसे बड़ा खेल सामग्री निर्माता और वैश्विक स्तर पर 21वां सबसे बड़ा निर्यातक है, जिसने 2023-24 में 90 से अधिक देशों को 523 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की खेल साम्रगी साम्रगी का निर्यात किया था।

इसके प्रमुख निर्यात गंतव्यों में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस शामिल हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त राष्ट्र अमीरात, कनाडा और स्वीडन में भी अवसर बढ़ रहे हैं।

 

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