‘अमादेर पारा अमादेर समाधान’ शिविरों में पहुंचे एक करोड़ लोग: ममता बनर्जी

कोलकाता, 29 अगस्त (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य में जनता की समस्याओं के निबटारे के लिए शुरू किए गए ‘अमादेर पारा, अमादेर समाधान’ (एपीएएस) शिविरों एक माह से कम से समय में एक करोड़ से ज़्यादा लोग अपनी समस्या समाधान के लिए आ चुके हैं। पश्चिम बंगाल सरकार की यह पहल शासन तक जनता की सीधी पहुंच के लिए शुरू किया गया था।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘अमादेर पारा अमादेर समाधान’ योजना में एक माह से कम समय में एक करोड़ से अधिक लोगों के पहुंचने को लेकर एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी और गर्व है कि सिर्फ़ 26 दिनों में, पूरे पश्चिम बंगाल से एक करोड़ से ज़्यादा लोग अपने इलाकों और आसपास की विभिन्न समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए लगभग 14,500 ‘अमादेर पारा, अमादेर समाधान’ शिविरों में आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी एक करोड़ का आंकड़ा पार करने के लिए प्रदेश के लोगों को बधाई। शिविर की सफलता को लेकर उन्होंने कहा कि इस पहल ने बंगाल की लोकतांत्रिक, सहभागी शासन की संस्कृति को मज़बूत किया है।
मुख्यमंत्री ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए ‘अथक’ काम करने वाले जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवकों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि 2 अगस्त से शुरू होकर 3 नवंबर तक चलने वाले अमादेर समाधान कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को उनकी समस्याओं का शासन के सहयोग से तत्काल समाधान प्रदान करना है।
ज्ञात रहे कि राज्य भर में 80,000 से ज़्यादा मतदान केंद्रों पर 27,000 से ज़्यादा शिविर आयोजित किए जाने हैं, जिनमें सड़क और नालियों की मरम्मत, कचरा निपटान और स्कूलों के रखरखाव जैसी तत्काल सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
सरकार ने इस अभियान के लिए 8,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें प्रत्येक बूथ के लिए 10 लाख रुपये बुनियादी ढांचे की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अलग से रखे गए हैं। शिविर आमतौर पर तीन बूथों को मिलाकर आयोजित किए जाते हैं, हालांकि ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में एक बूथ पर भी शिविर का आयोजन किया जा सकता है, जबकि शहरी केंद्रों में कई बूथों को एक साथ समूहीकृत किया जाता है।
इस शिविर में सेवानिवृत्त शिक्षक, सरकारी कर्मचारी और स्वयं सहायता समूह के सदस्य जैसे तटस्थ प्रतिनिधि, सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर स्थानीय मुद्दों की पहचान करने और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर समाधान का प्रयास करते हैं।
शिकायतकर्ताओं के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, सभी शिकायतों और समाधानों को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है, जबकि प्रत्येक शिविर का विवरण जनता की पहुंच के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाता है।
शिकायत निवारण के साथ-साथ, ये शिविर स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच भी प्रदान करते हैं, जो जमीनी स्तर के शासन को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ते हैं। इस योजना के शुभारंभ के बाद से, इस अभियान ने 1,200 शिविरों में 4.5 लाख से अधिक आवेदन पंजीकृत कि हैं।
मुख्यमंत्री ने लिखा, “इस सामाजिक-आर्थिक विकास पहल में बंगाल के पुरुषों और महिलाओं की अभूतपूर्व और सहज भागीदारी ने राज्य की लोकतांत्रिक और सहभागी सुशासन संस्कृति को और मजबूत किया है और उसमें और जान डाल दिया है।”
मुख्यमंत्री ने अपने प्रशासन में विश्वास रखने के लिए नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि उनकी ‘मां-माटी-मानुष’ वाली सरकार बंगाल में हर व्यक्ति के दरवाजे तक पहुंचती रहेगी और आने वाले दिनों में “त्वरित और सार्थक समाधान” प्रदान करती रहेगी।

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