विंध्य की डायरी
डा. रवि तिवारी
कहते है आवश्यकता ही अविष्कार की जननी होती है और मन में दृढ़ संकल्प, साहस के साथ भागीरथ प्रयास किया जाय तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है, फिर चाहे कोई भी कार्य क्यो न हो. शहर में बढ़ती जनसंख्या और भविष्य में यातायात की भीड़ को कम करने के लिये फ्लाई ओवर की परिकल्पना की गई और इसे धरातल पर उतारने के लिये उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला के भागीरथ प्रयास से रीवा शहर को फ्लाई ओवर की सौगात मिली है.
यह उप मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता का परिणाम ‘फ्लाई ओवर’ है. यातायात व्यवस्था के सुधार में यह मील का पत्थर साबित होगा. कमिश्नर बंगले से लेकर ढ़ेकहा तिराहे के आगे तक फ्लाई ओवर की सौगात यूं ही नही मिली. इसके लिये उप मुख्यमंत्री रीवा से लेकर दिल्ली तक लगातार प्रयास करते रहे. एक बार सर्वे हुआ और फाइल बीच में रूक गई. कुछ दिन पहले उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने दिल्ली में केन्द्रीय सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडक़री से मुलाकात कर फ्लाई ओवर की मांग रखी और शनिवार को विंध्य के लिये यह ऐतिहासिक क्षण था.
जब जबलपुर में लोकार्पण समारोह के दौरान केन्द्रीय सडक़ परिवहन मंत्री ने विंध्य के सबसे बड़े फ्लाई ओवर की घोषणा की. 150 करोड़ की लागत से यह बनकर तैयार होगा. विकास की सौगातो की माला में एक और फ्लाई ओवर का फूल पिरोया गया है. उप मुख्यमंत्री का शौक ‘विकास’ है. आने वाले भविष्य की संभावनाओ को भापते हुए उन्होने फ्लाई ओवर का संकल्प लिया. रिमही जनता को भी भरोसा था कि यह सौगात मिलेगी. तो वही उप मुख्यमंत्री को भी विश्वास था कि केन्द्रीय मंत्री उनके विश्वास को बनाए रखते हुए सौगात देंगे . सपना साकार हुआ और अब जमीन में खड़ा करने की तैयारी है.
कांग्रेस के अंदर पनप रहा विरोध का ज्वालामुखी
कांग्रेस के सृजन मंथन से निकले जिला और शहर अध्यक्ष को लेकर विंध्य में अंदर ही अंदर विरोध शुरू हो गया है. मैदान में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर आर्थिक रूप से मजबूत को अहमियत दी गई है, उनका पिछला बैकग्राउंड नही देखा गया. तो क्या यह माना जाय कि कांग्रेस में पैसे के आगे आर्थिक कमजोर कार्यकर्ता की दावेदारी हार गई? कई जगह जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओ के बजाय आर्थिक सम्पन्न को अध्यक्ष का ताज पहनाया गया. सिंगरौली शहर अध्यक्ष को लेकर अंदर ही अंदर विरोध चल रहा है. यहां ब्राम्हण, पिछड़ा वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है. जबकि यह ब्राम्हण, वैश्य और साहू बहूल्य क्षेत्र है. बावजूद इसके प्रवीण सिंह चौहान के हाथ में शहर की कमान सौप दी गई. अंदर सुलग रहा ज्वालामुखी कब विस्फोट करेगा कुछ कहा नही जा सकता. बहरहाल यह स्थित पूरे विंध्य में है.
पदाधिकारी बनने की चाहत
संगठन में पदाधिकारी बनने और राजनीतिक नियुक्तियां की चाहत में कार्यकर्ता गणेश परिक्रमा लगा रहे है. भाजपा में संगठन के नए फार्मूले के तहत अब संगठन और राजनीतिक नियुक्तियां पर्यवेक्षको के रिपोर्ट पर तय होगी. पर्यवेक्षक विंध्य में रायशुमारी करने के बाद बंद लिफाफा मुख्यालय तक पहुंचा दिये है और अब संगठन में दायित्व पाने के लिये गणेश परिक्रमा शुरू हो गई है. संघ से लेकर संगठन के बड़े नेताओ तक पहुंच का जुगाड़ लगाने का क्रम चल रहा है. हर स्तर पर प्रयास जारी है सत्ता के गलियारे में भी पदाधिकारी बनने की चाहत रखने वालो की भीड़ देखी जा रही है. विधायक-सांसद भी अपने कट्टर समर्थको को दायित्व दिलाने के लिये प्रयास में लगे हुए है. नियुक्ति का पिटारा कब खुलेगा यह तो भविष्य के गर्त में है पर भागीरथ प्रयास में कोई कमी नही होनी चाहिये.
