दलबदल कायम रख पाएगा लक्ष्मी की अध्यक्षी!


संजय व्यास

भाजपा की सुसनेर नगर परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया ने अपने खिलाफ 15 में से 12 पार्षदों द्वारा खोले गए मोर्चे से पस्त होकर पद बचाने के लिए कांग्रेस का दामन थाम लिया, लेकिन उनके सिर पर तलवार अभी भी लटकी हुई है. उल्लेखनीय है कि लक्ष्मी सिसोदिया की कार्यशैली से नाराज उनकी ही पार्टी के 7 भाजपा पार्षदों ने 4 कांग्रेसी और एक निर्दलीय पार्षद के साथ उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कुछ दिनों पूर्व उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने का संकल्प लिया था.

उसी तारतम्य में अविश्वास प्रस्ताव लाने हेतु कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिया. अविश्वास प्रस्ताव अभी प्रक्रिया में ही है इस बीच ल्क्ष्मी सिसोदिया ने अपने पार्टी संपर्कों के माधयम से भाजपा पार्षदों को समझाने के यत्न किए, मगर वे बेकार रहे. अंतत: कांग्रेस विधायक भैरू सिंह परिहार ‘बापू’ ने मौका देख लक्ष्मी सिसोदिया को संकट से उबारने का आफर दिया और उन्हें कांग्रेस ज्वाइन करवा दी.

बापू ने उन्हें 4 कांग्रेसी पार्षदों के समर्थन के प्रति आश्वस्त किया था, ताकि अविश्वास प्रस्ताव गिर सके. अब सूत्र बताते हैं कि श्रीमति सिसोदिया की मुिश्कलें कम नहीं हुई हैं, 2 कांग्रेसी पार्षद अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में अड़ गए हैं और अध्यक्ष पद से बेदखली पर अमादा हैं. प्रक्रिया के तहत सभी 12 आवेदकों के हस्ताक्षरों का मिलान हो चुका है. अब देखना होगा कि सदन में अविश्वास प्रस्ताव का सामना वे किस तरह करती हैं, दलबदल उनकी अध्यक्षी कायम रख पाता है या पद हाथ से जाता है.

बर्फ पिघलती नजर आ रही

भीलांचल में भूरिया-पटेल परिवार में मन पर जमीं बर्फ पिघलती नजर आ रही है. वर्षों से एक -दूसरे से प्रतिस्पर्धात्मक कटुता रखते आए झाबुआ के स्थापित नेता कांतिलाल भूरिया और अलीराजपुर के दबंग नेता महेश पटेल परिवार के बीच इस बार अलग ही नजारा देखने को मिला. झाबुआ- अलीराजपुर में कांग्रेस जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद भाबुआ विधायक व राष्ट्रीय आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के झाबुआ स्थित कार्यालय में दोनों जिलों के अध्यक्षों का स्वागत समारोह रखा गया.

झाबुआ जिलाध्यक्ष प्रकाश रांका एवं अलीराजपुर जिलाध्यक्ष मुकेश पटेल ने एक-दूसरे का स्वागत किया. कांतिलाल भूरिया ने भी मुकेश पटेल के प्रति विनम्रता दिखाई. उन्होंने दोनों कांग्रेस जिलाध्यक्षों को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए पार्टी की रीति-नीति के साथ पार्टी में हित में सक्रियता और मजबूती के साथ कार्य करने हेतु आव्हान किया तथा अपने-अपने जिलों में पार्टी का जिले के साथ ब्लॉक स्तरों पर भी विस्तार करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट कर आगामी चुनावों में मजबूती से कार्य करने की बात कहीं. वर्षों बाद यह पहला मौका था जिसमें दोनों राजनीतिक परिवार एक मंच पर आए.

ऐसी भी बाढ़

निमाड़ और मालवा में इन दोनों भारी बाढ़ और जल जमाव से लोग त्रस्त हैं. आश्चर्य की बात तो यह है, कि पिछले वर्षों से काफी कम बरसात इस बार हुई है, लेकिन हालात पहले इतने खराब कभी नहीं हुए. इसके पीछे का कारण यह बताया जा रहा है कि कृत्रिम बाढ़ों के कारण बड़ी नदियों की स्थिति गंभीर हो गई है. निमाड़ के खंडवा जिले की बात करें, तो यहां चार बड़े डेम हैं. इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर नर्मदा पर बने हैं.

खंडवा जिले में बारिश पिछले वर्ष की तुलना में 9 इंच यानी 175 मिलीमीटर कम हुई है. इसके बावजूद इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर के गेट कई बार खोले जा चुके हैं. इसका कारण यह है कि ऊपरी इलाके यानी अमरकंटक से खंडवा, ओंकारेश्वर तक चार डेम बने हुए हैं. जबलपुर के बरगी और मंडल की तरफ बारिश होती है, तो वहां पानी संग्रहित हो जाता है . इटारसी के पास तवा डैम के गेट भी खोल दिए जाते हैं. ऐसे माहौल में इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर की नर्मदा में बाढ़ आ जाती है.

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